फास्ट फूड बिजनेस कैसे शुरू करें। How to start Fast Food Business in India.

यद्यपि हम अक्सर सुनते हैं की Fast food स्वास्थ्य के लिए उतना स्वास्थ्यकर नहीं होता जितना की सामान्य भोजन होता है। लेकिन सच्चाई यह है की भले ही नियमित तौर पर फास्ट फूड का सेवन करना स्वास्थ्य की दृष्टि से ठीक न हो। लेकिन वर्तमान में युवाओं के बीच इससे लोकप्रिय भोजन शायद ही कुछ और हो। यही कारण है की वर्तमान में हर छोटी बड़ी गली मोहल्ले में कोई न कोई फास्ट फूड की दुकान अवश्य देखने को मिल जाएगी।

कहने का आशय यह है की फास्ट फूड का चलन भारत में बड़ी तेजी से बढ़ता जा रहा है इसका एक कारण औद्योगिकीकरण को भी माना जा रहा है। क्योंकि औद्योगिकीकरण से शहरों में कामकाजी अर्थात नौकरीपेशा लोगों की संख्या बढती है। और अपने परिवार से दूर रह रहे नौकरीपेशा युवाओं या व्यक्तियों की सबसे बड़ी परेशानी स्वयं के लिए खाना बनाने की होती है। यही कारण है की ऐसे युवा तेजी से फास्ट फूड खाने की ओर आकर्षित होते हैं और अपनी गली मोहल्ले में उपलब्ध Fast Food Stall से खाना लेना पसंद करते हैं ।

नौकरीपेशा लोगों के अलावा ऐसे युवा जो उच्च अध्यन के लिए अपने परिवार से दूर रहते हैं उनके लिए भी खाना बनाना किसी परेशानी से कम नहीं होता है। ऐसे में उनका रुख नजदीकी ढाबों, रेस्टोरेंट या फिर फास्ट फूड अड्डों की तरफ होता है। इसलिए आज हम हमारे इर्द गिर्द केवल फास्ट फूड स्टाल नहीं देखते बल्कि फास्ट फूड रेस्टोरेंट भी देखते हैं। जो इस तरह का यह बिजनेस सफलतापूर्वक कर रहे होते हैं। इससे पहले की हम इस तरह का बिजनेस करने की प्रक्रिया के बारे में विस्तृत तौर पर वार्तालाप करें। आइये जानते हैं की यह होता क्या है? ।

फास्ट फूड बिजनेस क्या है (What is Fast food Business in Hindi)

यद्यपि इसका नाम तो शायद सबने सुना होगा और अधिकतर लोगों ने इसे अपने जीवन में कभी न कभी खाया भी होगा। लेकिन इन सबके बावजूद यदि आप किसी से फास्ट फूड क्या है? के बारे में पूछेंगे तो शायद वह आपको कुछ फास्ट फूड आइटम के नाम तो अवश्य गिना देगा। लेकिन इसकी परिभाषा के मुताबिक यह बताने में शायद अक्षम होगा की यह होता क्या है।

जैसा की हम सबको विदित है की फास्ट फूड एक अंग्रेजी शब्द है और अंग्रेजी में फास्ट का मतलब तीव्र एवं फूड का अभिप्राय भोजन से लगाया जाता है। इसलिए शाब्दिक तौर पर इसका अर्थ ऐसे भोजन से लगाया जा सकता है जिसे बड़ी जल्दी एवं तेज गति से तैयार किया जा सकता है। अर्थात ऐसा भोजन जिसे तैयार करने या बनाने में कम समय लगता हो उसे इसकी श्रेणी में रखा जा सकता है।

इस तरह के आइटम शाकाहारी एवं मांसाहारी दोनों के लिए उपलब्ध रहते हैं इनमें पिज्जा, बर्गर, एग रोल, डोसा, आलू टिक्की, ढोकला, बटाटा बड़ा इत्यादि शामिल हैं। इसलिए जब किसी व्यक्ति द्वारा लोगों की आवश्यकता को ध्यान में रखकर फास्ट फूड स्टाल या फास्ट फूड रेस्टोरेंट खोला जाता है तो उसके द्वारा किया जाने वाला यह बिजनेस Fast food Business कहलाता है।

Fast-food-Business-plan in hindi

फास्ट फूड स्टाल या रेस्टोरेंट कैसे खोलें? (How to open a Fast food Stall or Restaurant)

इस बिजनेस को कोई भी व्यक्ति प्रमुख तौर पर दो तरीकों से शुरू कर सकता है इसमें पहला तरीका बेहद कम निवेश के साथ शुरू किया जा सकता है बशर्ते व्यक्ति को कुछ फास्ट फूड आइटम बनाने आने चाहिए। दूसरा तरीका अधिक लागत वाला तरीका है और इसमें जरुरी नहीं है की उद्यमी को फास्ट फूड आइटम बनाने आने ही चाहिए क्योंकि वह इन सब कामों के लिए कुक नियुक्त कर सकता है।

पहला तरीका – फास्ट फूड स्टाल कैसे शुरू करें (Fast food stall)

इस बिजनेस को करने का यह तरीका काफी सुरक्षित एवं कम लागत वाला तरीका है लेकिन इस तरह के बिजनेस को केवल उसी व्यक्ति को शुरू करना चाहिए जिसे फास्ट फूड आइटम पकाने का उचित अनुभव प्राप्त हो। क्योंकि इस तरह के बिजनेस का यह बेहद ही सूक्ष्म स्वरूप होता है और इसमें केवल एक व्यक्ति भी आसानी से सारा काम संभाल सकता है। फास्ट फूड स्टाल खोलने के लिए व्यक्ति को सर्वप्रथम किसी अच्छी लोकेशन जहाँ पैदल आने जाने वाले लोगों की संख्या हमेशा रहती हो का चयन करना होता है।

और यह भी पता करना होता है की क्या उस जगह विशेष पर स्टाल लगाने के लिए उसे किसी नगर निगम या ग्राम पंचायत इत्यादि को कुछ किराया तो नहीं देना है। आम तौर पर ऐसे स्टाल सड़क किनारे या स्थानीय मार्किट में लगाये जाते हैं। जो जगह स्थानीय प्राधिकरण जैसे नगर निगम, नगर पालिका के अधीन होती है इसलिए Fast food Stall लगाने से पहले उद्यमी इनसे संपर्क कर सकता है।

जगह की तलाशी खत्म होने के बाद व्यक्ति एक स्टाल बनवा सकता है जिसे लकड़ी एवं टीन इत्यादि धातु की मदद से काफी सुन्दर बनाया जा सकता है इसमें भी उद्यमी को कुछ हजार रूपये खर्च करने की आवश्यकत होती है। इन दो तीन प्रक्रियाओं को पूर्ण करने के बाद उद्यमी अपने द्वारा चयनित लोकेशन पर फास्ट फूड स्टाल लगाकर कमाई कर सकता है। यदि उद्यमी स्वयं फास्ट फूड आइटम पकाना जानता हो तो उसे इस बिजनेस को करने में 15-20 हजार रूपये ही लगेंगे।        

दूसरा तरीका – फास्ट फूड रेस्टोरेंट कैसे खोलें (Fast food Restaurant)

इस बिजनेस को शुरू करने का दूसरा तरीका यह है की उद्यमी स्वयं का फास्ट फूड रेस्टोरेंट खोले लेकिन रेस्टोरेंट खोलने के लिए व्यक्ति को काफी सारे पैसे निवेश करने की आवश्यकता होती है। लेकिन इसमें यह जरुरी नहीं है की बिजनेस शुरू कर रहे व्यक्ति को फास्ट फूड आइटम पकाने आने ही चाहिए। बल्कि वह इन सब कार्यों को करने के लिए कुक की नियुक्ति कर सकता है। चूँकि फास्ट फूड रेस्टोरेंट खोलने में उद्यमी को अच्छे खासे पैसे खर्च करने की आवश्यकता होती है इसलिए इस तरह का बिजनेस उद्यमी को बेहद सोच समझकर शुरू करने की आवश्यकता होती है। उद्यमी चाहे तो स्वयं का Fast food Restaurant खोलने के लिए निम्न कदम उठा सकता है।  

1. बिजनेस लोकेशन (Location for fast food business)

आम तौर पर अधिकतर ऐसे बिजनेस होते हैं जिनकी सफलता में उनकी लोकेशन का अहम् योगदान होता है अर्थात एक अच्छी लोकेशन पर शुरू किया गया बिजनेस के सफल होने की संभावना अधिक होती है। इसलिए इस बिजनेस के लिए भी एक अच्छी लोकेशन का चयन करना अत्यंत आवश्यक है। अच्छी लोकेशन से हमारा आशय एक ऐसी लोकेशन से है जहाँ से दिन भर में सैकड़ों हजारों लोग पैदल चलते हों।

क्योंकि जितनी अधिक भीड़ भाड़ वाली लोकेशन पर इस तरह का बिजनेस किया जायेगा उतने ही अधिक इस बिजनेस के सफल होने की संभावना होगी। इसके अलावा रेस्टोरेंट के लिए लोकेशन का चयन करते समय उद्यमी को आधारभूत आवश्यकताओं जैसे बिजली, पानी, सड़क पर भी विचार करना अति आवश्यक है।     

2. बिजनेस प्लान (Make a Business Plan for Fast food Business)

यद्यपि उद्यमी चाहे तो यह कार्य पहले भी कर सकता है लेकिन जैसा की हम सबको विदित है की लोकेशन के आधार पर किराये पर ली जाने वाली जगह का किराया अंतरित हो सकता है। इसलिए उद्यमी को चाहिए की वह अपने फ़ास्ट फ़ूड रेस्टोरेंट के लिए बिजनेस प्लान बिजनेस लोकेशन का चुनाव करने के बाद ही तैयार करे ताकि किराया इत्यादि खर्चों को बिजनेस प्लान में वास्तविकता के नजदीक दिखाया जा सके।

बिजनेस प्लान क्या है कैसे बनाये? की जानकारी के लिए पढ़ें।   

3. फाइनेंस का प्रबंध (Arrangement of Finance)

चूँकि एक बिजनेस प्लान बिजनेस के लक्ष्यों का ही नहीं बल्कि बिजनेस के अनुमानित खर्चों एवं कमाई को इंगित करने वाला भी एक दस्तावेज होता है। इसलिए इसे तैयार करने के बाद उद्यमी को इस बात का पता चल जाता है की उसे खुद का रेस्टोरेंट खोलने के लिए कितने पैसों की आवश्यकता हो सकती है। इसलिए अब उद्यमी का अगला कदम अपने बिजनेस के लिए फाइनेंस का प्रबंध करने का होना चाहिए। बैंक ऋणों के अलावा उद्यमी स्वयं के नाते रिश्तेदारों, क्राउड फंडिंग, एंजेल इन्वेस्टर इत्यादि के माध्यम से फण्ड एकत्रित कर सकता है।    

4. जगह किराये पर लें (Rent a Shop for Fast food Restaurant)

चूँकि इस प्रक्रिया में उद्यमी द्वारा सर्वप्रथम बिजनेस लोकेशन का ही चुनाव किया गया है इसलिए अब उद्यमी को स्वयं का यह बिजनेस करने के लिए उस चयानित लोकेशन पर जगह किराये पर लेनी होगी। जगह किराये पर लेते वक्त इस बात का ध्यान अवश्य रखे की आपके पास इतनी जगह अवश्य होनी चाहिए जो आपके बिजनेस प्लान के मुताबिक आपको सभी व्यवसायिक गतिविधयों को सफलतापूर्वक अंजाम देने में सहायक हो।

जगह के आकार या साइज़ के आधार पर भी किराया अंतरित हो सकता है। और जगह के मालिक से Lease Agreement अवश्य कराएँ वह इसलिए क्योंकि इस दुकान को किराये पर लेने के बाद भी आपको बहुत अधिक निवेश की आवश्यकता होगी। और आपको अपनी व्यवसायिक आवश्यकता के अनुरूप ही इस जगह पर इंटीरियर का काम कराना होगा।        

5. स्टाफ की नियुक्ति (Appoint Staffs)

चाहे व्यक्ति को कितना ही स्वादिष्ट Fast Food Item बनाने क्यों न आते हों लेकिन जब बात रेस्टोरेंट की आती है तो इसे चलाना किसी एक व्यक्ति के बस की बात बिलकुल भी नहीं है। कहने का आशय यह है की फास्ट फूड स्टाल को तो एक व्यक्ति चला सकता है लेकिन एक रेस्टोरेंट को बिना स्टाफ की नियुक्ति किये चलाना असम्भव है। इसलिए इस तरह का बिजनेस करने के लिए उद्यमी को विभिन्न स्टाफ जैसे रसोइये, वेटर, कैप्टेन, मेनेजर, बर्तन धोने वाले, इलेक्ट्रीशियन इत्यादि की आवश्यकता हो सकती है।     

5. मशीनरी, उपकरण कच्चा माल खरीदें

अब उद्यमी को अपने Fast food Restaurant के लिए मशीनरी, उपकरण एवं कच्चा माल खरीदना चाहिए क्योंकि वर्तमान में बहुत सारी मशीनरी एवं इलेक्ट्रिक उपकरणों को रसोई का हिस्सा बनाकर काम में तेजी लाई जा सकती है। यद्यपि उद्यमी को मशीनरी उपकरण एवं कच्चे माल में क्या क्या चाहिए होगा यह सब कुछ उसके द्वारा अपने ग्राहकों को ऑफर किये जाने वाले फास्ट फूड आइटम पर निर्भर करेगा ।

क्योंकि आम तौर पर अलग अलग फास्ट फूड आइटम को बनाने का तरीका अलग अलग होता है इसलिए इन्हें बनाने में इस्तेमाल में लायी जाने वाली मशीनरी, उपकरण एवं कच्चा माल भी अलग अलग हो सकता है। लेकिन कुछ सामान्य उपकरणों की बात करें तो इनमें रसोई के बर्तन, गैस एवं गैस चूल्हे इत्यादि शामिल हैं।    

6. आवश्यक पंजीकरण एवं लाइसेंस (License & Registration for Fast food Restaurant)

हालांकि भारत में छोटे स्तर पर इस तरह का यह बिजनेस बिना किसी आज्ञा या पंजीकरण के धड़ल्ले से हर शहर नगर में चल रहे हैं। लेकिन जब बात फ़ास्ट फ़ूड रेस्टोरेंट की आती है तो उद्यमी को टैक्स रजिस्ट्रेशन के अलावा, एफएसएसआई लाइसेंस इत्यादि की भी आवश्यकता होती है। कहने का अभिप्राय यह है की इस तरह का बिजनेस करने के लिए फूड लाइसेंस की आवश्यकता अनिवार्य रूप से होती है। यद्यपि जहाँ तक टैक्स रजिस्ट्रेशन की अनिवार्यता का सवाल है यह बिजनेस के आकार, प्रकार, सालाना टर्नओवर इत्यादि पर निर्भर करता है।

यदि उद्यमी इस तरह का यह बिजनेस किसी टूरिस्ट डेस्टिनेशन पर कर रहा हो और वहां पर दुनिया भर से पर्यटक घुमने आते हों तो उद्यमी को अपना Fast food Restaurant Business सफल बनाने के लिए ऑनलाइन मार्केटिंग का सहारा लेना चाहिए। इसके तहत वह सोशल मीडिया मार्केटिंग, सर्च इंजन मार्केटिंग, मोबाइल मार्केटिंग इत्यादि का सहारा ले सकता है।

हालांकि फ़ास्ट फ़ूड बिजनेस खाद्य और पेय श्रेणी से जुड़ा व्यवसाय है। लेकिन यदि आप फ़ूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री और कृषि से जुड़े उद्योगों के बारे में विस्तार पूर्वक जानना चाहते हैं। तो आप इस किताब को खरीद सकते हैं। इसमें ऐसे सैकड़ों व्यवसायों के बारे में बताया गया है जो फ़ूड प्रोसेसिंग और कृषि से जुड़े हुए हैं। इन परियोजनाओं की पूरी जानकारी लागत से लेकर मशीनरी, कच्चा माल, विनिर्माण प्रक्रिया उपर्युक्त  किताब में दी गई है। इसलिए यदि आपको लगता है की यह आपके लिए फायदेमंद हो सकती हैं। और आपके उद्यमी बनने की राह में आने वाली मुश्किलों को आसान कर सकती है। तो आप इसे खरीद सकते हैं।

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5 thoughts on “फास्ट फूड बिजनेस कैसे शुरू करें। How to start Fast Food Business in India.”

    • बंटी जी, आपको शुरुआत तो एक – दो स्टाल से ही करनी होगी. अन्यथा निवेश एवं जोखिम दोनों अधिक होंगे.

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