स्टेशनरी की दुकान का व्यापार कैसे शुरू करें। 6 Easy Steps to open Stationary Shop.

Stationary Shop Business : इसकी यदि हम बात करें तो इसे आम तौर पर शिक्षा से जुड़ा हुआ बिजनेस माना जाता है और आम तौर पर वर्तमान में हम देखते हैं की लोग अपने बच्चों की शिक्षा के प्रति काफी जागरूक हो गए हैं । इसलिए लोग अपने बच्चों की शिक्षा से जुड़ी हर वस्तु को स्टेशनरी की दुकान से खुशी खुशी खरीदने को तत्पर रहते हैं। यही कारण है की वर्तमान में स्टेशनरी दुकान के व्यापार को भी एक लाभकारी व्यवसाय के तौर पर देखा जाता है।

स्टेशनरी आइटम की आवश्यकता न केवल पढने वाले बच्चों के घरों में होती है, बल्कि स्कूलों, कॉलेज, यूनिवर्सिटी, कंपनी के कार्यालयों इत्यादि में भी स्टेशनरी आइटम की भारी मांग होती है । इसलिए इस तरह के बिजनेस को उद्यमी चाहे तो बड़े स्तर तक भी बढ़ा कर इस क्षेत्र में खुद का ब्रांड भी स्थापित कर सकता है। शहरों में स्टेशनरी की दुकान खोलकर उद्यमी उस एरिया में स्थित कॉलेज, स्कूल, यूनिवर्सिटी, ऑफिस इत्यादि को भी स्टेशनरी आइटम सप्लाई करके खुद की कमाई कर सकता है।

कहने का अभिप्राय यह है की वर्तमान में स्टेशनरी आइटम सिर्फ पेन, पेन्सिल इत्यादि तक ही सिमित नहीं रह गए हैं बल्कि इनकी लिस्ट में सैकड़ों आइटम जुड़ चुकी हैं। जिनकी आवश्यकता लोगों को अपने दैनिक जीवन में पड़ती रहती है। इससे पहले की हम इस विषय पर और वार्तालाप करें आइये जानते हैं की स्टेशनरी की दुकान होती क्या है।

Stationary-Shop business

स्टेशनरी दुकान क्या होती है?( What is a stationary Shop in Hindi):

आम तौर पर स्टेशनरी आइटम में वे सभी वस्तुएं आती हैं जिनका इस्तेमाल लिखने की प्रक्रिया के दौरान किया जाता है इनमें पेन, पेन्सिल, नोटपैड यहाँ तक की प्रिंटिंग स्टेशनरी में शामिल कार्ट्रिज, A4 Size Paper इत्यादि भी स्टेशनरी आइटम में भी शामिल हैं। इसलिए एक ऐसी दुकान जहाँ पेन, पेन्सिल से लेकर सभी कंप्यूटर स्टेशनरी एवं प्रिंटिंग स्टेशनरी के उपकरण मिलते हों उसे एक स्टेशनरी की दुकान कहा जा सकता है।

स्टेशनरी आइटम की आवश्यकता केवल शैक्षणिक संस्थानों जैसे स्कूल, कॉलेज या विश्वविद्यालयों में ही नहीं होती है बल्कि घरों एवं कार्यालयों में भी विभिन्न कार्यों की निष्पादित करने के लिए इनकी आवश्यकता होती रहती है। यही कारण है की वर्तमान में हर स्थानीय बाजार में एक या एक से अधिक स्टेशनरी शॉप देखने को मिल ही जाती हैं।

स्टेशनरी आइटम के प्रमुख प्रकार (Types of Stationary Items in Hindi): 

यहाँ पर हम आपको बता देना चाहेंगे की Stationary Items को इनके उपयोग के आधार पर प्रमुख रूप से तीन भागों में विभाजित किया जा सकता है। जिनका संक्षिप्त विवरण कुछ इस प्रकार से है।

1. सामान्य स्टेशनरी आइटम (General Stationary):

सामान्य स्टेशनरी आइटम से हमारा आशय ऐसे स्टेशनरी आइटम से है जिनका उपयोग सामान्य इस्तेमाल में किया जाता है । इनमें मुख्य तौर पर पेन, पेन्सिल, इरेज़र, लिफाफे, नोटपैड इत्यादि शामिल हैं।

2. प्रिंटिंग स्टेशनरी आइटम (Printing Stationary):  

जैसा की नाम से ही स्पष्ट है प्रिंटिंग स्टेशनरी आइटम का इस्तेमाल मुद्रण अर्थात प्रिंटिंग कार्यों को अंजाम देने में किया जाता है। इसमें A4 Size Paper, Bond Paper, Printer Cartridge, Printer Ink इत्यादि शामिल है।

3. कंप्यूटर स्टेशनरी आइटम (Computer Stationary):

कंप्यूटर स्टेशनरी आइटम से हमारा आशय ऐसे स्टेशनरी आइटम से है जिनका इस्तेमाल कंप्यूटर में किया जाता है। इनमें मुख्य तौर पर पैन ड्राइव, सीडी, डीबीडी, माउस पैड इत्यादि शामिल हैं।

स्टेशनरी की दुकान कैसे शुरू करें (How to Open Stationary Shop in India):

यद्यपि यदि आप किसी व्यक्ति से स्टेशनरी की दुकान खोलने की प्रक्रिया के बारे में पूछेंगे तो उसका बेहद ही आसान सा जवाब होगा। की सर्वप्रथम एक दुकान किराएँ पर लें और उसमें रैक इत्यादि का काम कराएँ उसके बाद स्टेशनरी आइटम खरीदकर उन्हें अपनी दुकान के माध्यम से बेचकर कमाई करें। लेकिन एक व्यक्ति को इस तरह का बिजनेस शुरू करने के लिए इससे भी अधिक अर्थात विभिन्न प्रक्रियाओं से होकर गुजरना पड़ सकता है। जिनका संक्षिप्त वर्णन हम नीचे करने वाले हैं।      

1. लोकेशन का चयन करें (Select Location for your Stationary Shop):

खुद की स्टेशनरी शॉप खोलने के लिए व्यक्ति को सर्वप्रथम एक अच्छी सी लोकेशन का चयन करना होता है। इस तरह के बिजनेस के लिए किसी कॉलेज, स्कूल, विश्वविद्यालय के आस पास की लोकेशन उपयुक्त हो सकती है। इसके अलावा एक ऐसा एरिया जहाँ कंपनी के ऑफिस इत्यादि की संख्या अधिक हो में भी इस तरह का बिजनेस करना लाभकारी हो सकता है।

कहने का अभिप्राय यह है की यदि उद्यमी अपनी स्टेशनरी दुकान के लिए किसी ऐसी लोकेशन का चयन करता है जहाँ शिक्षण संस्थानों की अधिकता है तो इस स्थिति में उसके मुख्य ग्राहक विद्यार्थी एवं उनके माता पिता होंगे। जबकि किसी कंपनी कार्यालयों की अधिकता वाले एरिया में उद्यमी को कॉर्पोरेट क्लाइंट भी मिल सकते हैं । और उद्यमी कंपनी के कार्यालयों में स्टेशनरी का सामन सप्लाई करने के लिए कॉन्ट्रैक्ट कर सकता है। इसलिए इच्छुक उद्यमी को दुकान के लिए लोकेशन का चयन बड़ी सोच समझकर करना बेहद आवश्यक है।      

2. दुकान किराये पर लें (Rent a shop in selected location):

लोकेशन चयन करने के बाद स्टेशनरी की दुकान खोल रहे उद्यमी का अगला कदम उस एरिया में एक उचित दुकान खोजने का होना चाहिए।कहने का आशय यह है की अब उद्यमी को उस चयनित एरिया में एक दुकान किराये पर लेनी होगी जहाँ से वह अपने ग्राहकों को स्टेशनरी आइटम बेच पाने में सक्षम हो पायेगा। लेकिन अधिकतर लोग दुकान के मालिक से मौखिक बात करके ही दुकान किराये पर ले लेते हैं जिससे उन्हें दुकान का पता प्रमाण पत्र बनाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

इसलिए इस बिजनेस को कर रहे उद्यमी को चाहिए की वह दुकान किराये पर लेते वक्त Rent Agreement  अवश्य बना ले जिसे वह विभिन्न कामों जैसे जीएसटी रजिस्ट्रेशन, चालू बैंक खाता खोलने इत्यादि प्रक्रियाओं में पता प्रमाण के तौर पर पेश कर सके।   

3. Stationary Shop का रजिस्ट्रेशन एवं पंजीकरण:

वैसे देखा जाय तो शुरूआती दौर में छोटे स्तर पर इस तरह का बिजनेस करने के लिए किसी विशेष लाइसेंस एवं पंजीकरण की आवश्यकता तो नहीं होती है। लेकिन स्थानीय नियम अलग अलग भी हो सकते हैं इसलिए उद्यमी को इस बारे में स्थानीय निकाय जैसे नगर निगम, ग्राम पंचायत इत्यादि को सूचित करना ठीक रहता है। इसके अलावा यदि उद्यमी कॉर्पोरेट क्लाइंट से डील करना चाहता है तो उसे जीएसटी रजिस्ट्रेशन, दुकान के नाम से चालू बैंक खाता खोलने इत्यादि की भी आवश्यकता हो सकती है।    

4. Stationary Shop के लिए स्टेशनरी लिस्ट फाइनल करना:

अब यदि उद्यमी द्वारा आवश्यक रजिस्ट्रेशन एवं पंजीकरण की प्रक्रियाएं पूर्ण कर ली गई हों तो अब उद्यमी का अगला कदम खुद की स्टेशनरी दुकान के लिए स्टेशनरी की लिस्ट फाइनल करने का होना चाहिए। यह इसलिए जरुरी हो जाता है क्योंकि स्टेशनरी आइटम में एक नहीं बल्कि सैकड़ों हजारों शामिल हैं इसलिए यदि दुकानदार सभी आइटम को अपने दुकान में शामिल करेगा तो उसे इन आइटम को खरीदने के लिए एक अच्छे खासे बजट की आवश्यकता हो सकती है।

और इसके बावजूद इस बात की कोई गारंटी नहीं है की उसके द्वारा खरीदी गई हर आइटम उस लोकेशन पर बिकेगी ही बिकेगी। इसलिए इस तरह के बिजनेस के शुरूआती दौर में उद्यमी को केवल कुछ जरुरी आइटम्स को ही अपनी दुकान का हिस्सा बनाना चाहिए और धीरे धीरे ग्राहकों की आवश्यकता के अनुरूप अपनी दुकान में स्टेशनरी आइटम की मात्रा को बढ़ाना चाहिए। इस प्रकार इस तरह के कार्य को अंजाम देने के लिए उद्यमी को अपनी दुकान के लिए एक Stationary List final करनी होगी।       

5. Stationary Shop हेतु स्टेशनरी सप्लायर ढूंढें:

अब यदि उद्यमी द्वारा अपनी दुकान के लिए स्टेशनरी की लिस्ट फाइनल कर दी गई हो तो अब उद्यमी का अगला कदम उस एरिया में अच्छे ढंग से सप्लाई करने वाला सप्लायर ढूंढना चाहिए। अगर उद्यमी के पास उस एरिया में स्थित किसी सप्लायर इत्यादि का संपर्क नंबर नहीं है तो वह उस एरिया में पहले चल रही स्टेशनरी की दुकानों से पता कर सकता है की उनके यहाँ कौन सा सप्लायर सामान देके जाता है। ध्यान रहे उद्यमी को एक ऐसे सप्लायर का चुनाव करना है जिसकी सर्विस उस एरिया में उत्कृष्ट हो और वह उचित दामों पर स्टेशनरी की वस्तुएं प्रदान कर रहा हो।   

6. स्टेशनरी आइटम खरीदना (Buy Stationary items for your shop) :

स्टेशनरी सप्लायर ढूँढने के बाद उद्यमी को अपने द्वारा फाइनल की गई स्टेशनरी लिस्ट के आधार पर सामान खरीद लेना चाहिए । ध्यान रहे शुरूआती दौर में उद्यमी को कम ही सामान खरीदना चाहिए और साथ में लोगों की आवश्यकताओं का मूल्यांकन भी करते रहना चाहिए। थोड़े ही दिनों में उद्यमी को पता लग जायेगा की उस एरिया विशेष में लोग कौन सी स्टेशनरी आइटम को अधिक खरीद रहे हैं। उसके बाद उद्यमी को इस बात का विशेष ध्यान रखना होगा की अधिक बिक्री वाला सामान उद्यमी की दुकान में कभी खत्म ही न होने पाए। और ऐसी किसी भी आइटम का आर्डर न हो जो वर्षों तक बिके ही नहीं। यह सब उद्यमी के प्रबंधन कौशल पर निर्भर करेगा।     

Stationary Shop को सफल बनाने के कुछ टिप्स:

वर्तमान में स्टेशनरी आइटम की आवश्यकता यत्र, तत्र, सर्वत्र है कहना बिकुल भी गलत नहीं है। और तो और वर्तमान की शिक्षा प्रणाली को भी इस तरह से विकसित कर दिया गया है की एक विद्यार्थी को पेन, पेन्सिल, कॉपी, किताब इत्यादि खरीदने के अलावा भी बहुत कुछ सामान पूरे साल भर स्टेशनरी शॉप से खरीदने की आवश्यकता होती है।

इसलिए सिर्फ स्टेशनरी की दुकान खोलकर उसमें बैठकर ग्राहकों का इंतजार करना ही इस बिजनेस को सफल बनाने के लिए पर्याप्त नहीं है। बल्कि खुद के बिजनेस को सफल बनाने के लिए उद्यमी को एक मार्केटिंग रणनीति बनाकर उसका अनुसरण करने की आवश्यकता होती है। स्टेशनरी दुकान बिजनेस को सफल बनाने के लिए कुछ प्रमुख टिप्स इस प्रकार से हैं।

  • इस बिजनेस की सफलता में इसकी लोकेशन का अहम् योगदान होता है। इसलिए दुकान के लिए लोकेशन का चयन उपर्युक्त बताई गई बातों का ध्यान रखकर ही करें।
  • कॉर्पोरेट क्लाइंट पाने के लिए कंपनी के कार्यालयों का भ्रमण करें और उन्हें उचित दामों की कोटेशन देकर लुभाने की कोशिश करें।
  • शुरूआती दौर में कुछ प्रमुख स्टेशनरी आइटम को ही अपनी दुकान का हिस्सा बनायें और फिर ग्राहकों की आवश्यकता के अनुरूप इन्हें बढाते चले जाएँ।
  • दुकान में उपलब्ध स्टॉक एवं मंगाए जाने वाले सामान का उचित प्रबंधन करें स्टेशनी आइटम की लिस्ट इनकी बिक्री के आधार पर बनायें। अर्थात अधिक बिक्री वाली आइटम को प्रमुखता दें और दुकान में इसकी कमी न होने दें। जबकि ऐसी कोई भी आइटम मँगाने से बचें जो बिकती ही न हो।
  • ऐसे सप्लायर की नियुक्ति करें जो जरुरत पड़ने पर एक दो घंटे में ही माल पहुँचाने की जिम्मेदारी लेता हो। इससे Stationary Shop पर ग्राहकों का विश्वास बढ़ता है।

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2 thoughts on “स्टेशनरी की दुकान का व्यापार कैसे शुरू करें। 6 Easy Steps to open Stationary Shop.”

  1. हमारे ऐरिया मे सप्लायर है या नही कैसे पता करे..
    क्योंकि हम जहाँ शाॕप खोल रहे हैं वह मेन मार्केट से अंदर है |
    सरवां , बहादुरगंज रोड , मऊ नाथ भंजन उत्तर प्रदेश

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