कोचिंग सेंटर कैसे शुरू करें? How to Start a Coaching Center in India.

Coaching center business plan in Hindi – मनुष्य अपने जीवन में जिन चीजों को सबसे ज्यादा महत्व देता है उनमें शिक्षा भी शामिल है और यह इसी शिक्षा से जुड़ा हुआ बिजनेस है। वैसे देखा जाय तो वर्तमान परिदृश्य में रोटी, कपड़ा और मकान ही मनुष्य की अति आवश्यक जरूरतों में शामिल नहीं है बल्कि स्वास्थ्य एवं शिक्षा भी मनुष्य जीवन के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो गई हैं । यही कारण है की ये दो क्षेत्र ऐसे हैं चाहे पूरी दुनिया किसी भी संकट से क्यों न गुज़र रही हो लेकिन इनमें कभी भी मंदी नहीं आती है।

वह इसलिए क्योंकि हर माता पिता अपने बच्चों को शिक्षा देना अनिवार्य समझते हैं। और शिक्षा के बारे में एक संस्कृत श्लोक के माध्यम से भी कहा गया है की ‘’माता शत्रु पिता वैरी येन बालो न पाठित: । न शोभते सभामध्ये हंसमध्ये वको यथा।।‘’ अर्थात जो माता पिता अपने बालकों को पढ़ाते नहीं है ऐसे माता पिता शत्रु के समान हैं। क्योंकि जिस प्रकार हंसों के बीच बगुला शोभा नहीं देता ठीक उसी प्रकार शिक्षित या विद्वान लोगों की सभा में अशिक्षित लोग शोभा नहीं देते। आज के समय में हर माता पिता को इस श्लोक की महत्वता समझ में आ रही है और वे अपने बच्चों को हर हाल में शिक्षा ग्रहण करवाने के लिए प्रयासरत हैं।

लोगों की शिक्षा एवं इसके महत्व को लेकर बढती जागरूकता के कारण इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा भी काफी बढ़ गई है इसलिए इस प्रतिस्पर्धा की दौड़ में हर माता पिता अपने बच्चों को एक दुसरे से आगे देखना चाहते हैं। और उनकी इस आवश्यकता की पूर्ति के लिए कोचिंग या ट्यूशन क्लास की उत्पति हुई है। जैसा की हम सब अच्छी तरह से जानते हैं की किसी भी व्यक्ति को यदि निजी या सार्वजनिक क्षेत्र में अच्छी नौकरी चाहिए तो सबसे पहले उसकी शैक्षणिक योग्यता का ही मूल्यांकन किया जाता है और बाकी चीजें बाद में देखी जाती है।

शिक्षा एवं ज्ञान अर्जित करने से मनुष्य के मष्तिष्क का विकास होता है यही कारण है की शिक्षा को योग्यता का प्रथम मापदंड माना जाता है। यही कारण है की माता पिता अपने बच्चों की उज्जवल भविष्य की कामना के वशीभूत होकर उन्हें पढाई की ओर हर तरह से प्रेरित करते हैं और उनका किसी कोचिंग सेण्टर में ट्यूशन क्लास लगाने से भी नहीं हिचकिचाते। यही कारण है की वर्तमान में शिक्षा के क्षेत्र से जुड़ा यह व्यापार भी बेहद लाभकारी एवं कम निवेश से शुरू किया जाने वाले व्यापारों में शामिल है।

Coaching Center business kaise start kare

कोचिंग सेण्टर क्या है (What is a Coaching Center)

हालांकि इसमें कोई दो राय नहीं की बहुत सारी बातें बच्चा पहली बार अपने परिवार एवं घर से सीखता है इसलिए घर को बच्चे की प्रथम पाठशाला भी कहा जाता है। लेकिन उम्र एवं रूचि के आधार पर बच्चे की पढाई में भी बदलाव आता रहता है। बुनियादी शिक्षा प्राप्त करने के लिए बच्चे पहले स्कूल जाते हैं उसके बाद कॉलेज और उसके बाद यदि किसी को कोई प्रतिस्पर्धात्मक परीक्षा या कोई अन्य व्यवसायिक शिक्षा ग्रहण करनी होती है तो वह उस क्षेत्र विशेष के शैक्षणिक संस्थान में प्रवेश करता है।

इसलिए एक कोचिंग देने वाले का काम बच्चों को किसी एक या एक से अधिक विषय में कोचिंग देने का होता है अर्थात उन्हें ट्यूशन क्लास प्रदान करने का होता है जिससे वे चीजों को अच्छी एवं शीघ्रता से समझ सकें और अपनी कक्षा में अच्छे नम्बरों से उत्तीर्ण हो सकें। कोचिंग सेण्टर में कोच या टीचर का कार्य अपने विद्यार्थियों या ग्राहकों को किसी विषय के बारे में जानकारी देने का होता है ताकि वे उस जानकारी का उपयोग अपनी परीक्षा में कर सकें। साधारण भाषा में जिस स्थान पर विद्यार्थियों को ट्यूशन पढाया जाता है उसे Coaching Center कहा जा सकता है।

कोचिंग सेण्टर कैसे शुरू करें? (How to Start a Coaching Center in India)

हालांकि बहुत सारे लोगों को लगता है की उन्हें खुद का कोचिंग केंद्र शुरू करने के लिए खुद ही टीचर होना चाहिए। या फिर उन्हें किसी भी एक विषय की विशिष्ट जानकारी होनी चाहिए जो वे अपने विद्यार्थियों को सीखा सकें। हालांकि यह सत्य है की यह बिजनेस ऐसा है जिसमें उद्यमी ज्ञान एवं जानकारी प्रदान करके पैसे कमा रहा होता है। लेकिन यह बिलकुल सत्य नहीं है की इस बिजनेस को केवल टीचर या फिर ऐसे लोग जिन्हें किसी विषय की उचित जानकारी है वही शुरू कर सकते हैं।

बल्कि सच्चाई यह है की इस बिजनेस को भी अन्य व्यापारों की तरह कोई भी शुरू कर सकता है बशर्ते उद्यमी में इस व्यापार को शुरू करने में आने वाली लागत को वहन करने की क्षमता हो। लेकिन एक बात से इंकार नहीं किया जा सकता है की यदि इस बिजनेस को करने वाला व्यक्ति खुद ही टीचर या फिर किसी विषय का ज्ञाता है तो वह इसे अपने घर के किसी खाली कमरे से भी आसानी से शुरू कर सकता है।

जबकि एक आम आदमी को केवल और केवल घर के बाहर जगह किराये पर लेकर या खुद खरीदकर और पढ़ाने वाले टीचरों की नियुक्ति करके इस बिजनेस को शुरू करना होता है। इसके अलावा ऐसे उद्यमी जो पहले से कोई स्कूल चला रहे हों वे स्कूल टाइमिंग ख़त्म होने के बाद उन्हीं कक्षाओं में कोचिंग देना भी शुरू कर सकते हैं। तो आइये जानते हैं एक Coaching Center शुरू करने के लिए कौन कौन से जरुरी कदम उठाने की आवश्यकता हो सकती है।

1. Coaching Center के लिए विषय निर्धारित करें

यदि उद्यमी स्वयं कोई अध्यापक या किसी विषय विशेष का ज्ञाता है तो उसे अपने विषय के मुताबिक ही विषय निर्धारित करना होगा। अर्थात जिस विषय में वह विशेषज्ञता रखता हो उसे शुराती दौर में उसी विषय पर विद्यार्थियों को कोचिंग देने की कोशिश करनी चाहिए। इसके अलावा यदि उद्यमी शिक्षा के क्षेत्र से सम्बद्ध नहीं है तो वह कुछ ऐसे विषयों को निर्धारित करने की योजना बना सकता है।

जिन विषयों का ट्यूशन उस एरिया में बच्चों द्वारा अधिक लिया जाता हो हालांकि यह जानकारी प्राप्त करने के लिए उद्यमी को उस एरिया का विश्लेषण करना होगा की ऐसे कौन से विषय हैं जिन विषयों को विद्यार्थियों को समझने में कठिनाई होती है। और वे उन विषयों की कोचिंग लेने को आतुर रहते हैं।

कहने का अभिप्राय यह है की यदि उद्यमी द्वारा विषयों का चयन एवं निर्धारण उस एरिया में उपलब्ध मांग के आधार पर किया जाता है तो उद्यमी को कम समय में अधिक विद्यार्थी मिलने की संभावना जताई जा सकती है। इसलिए इस तरह के व्यापार को शुरू करने के लिए पहला कदम एरिया में विद्यार्थियों की समस्या के मुताबिक विषयों का चयन करना अति आवश्यक है।      

2. सही लोकेशन का चुनाव करें (Select a good location for center)

यद्यपि शुरूआती दौर में उद्यमी चाहे तो कोई छोटी जगह किराये पर लेकर भी यह बिजनेस शुरू कर सकता है। यह एक ऐसे स्थान पर होना चाहिए जहाँ विद्यार्थी आसानी से पहुँच सके और यदि वे अपना कोई व्हीकल जैसे मोटर बाइक या गाड़ी इत्यादि लेकर आते हैं तो उन्हें पार्क करने की भी उचित व्यवस्था होनी चाहिए। हालांकि एक अच्छा कोचिंग सेण्टर यदि रिहायशी इलाके से एक दो किलोमीटर की दूरी पर भी हो तब भी बच्चे वहां पढना पसंद करते हैं।

लेकिन शुरूआती दौर में न तो उद्यमी के बारे में और न ही उसके सेण्टर के बारे में कोई जानता होगा इसलिए इसे एक व्यस्त इलाके में होना चाहिए। या फिर किसी स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी इत्यादि के समीप होना भी कोचिंग सेण्टर के लिए लाभकारी हो सकता है। यदि उद्यमी की योजना विभिन्न कक्षाओं के विद्यार्थियों को विभिन्न विषयों की कोचिंग देने की है तो उसे एक बड़ी जगह की आवश्यकता हो सकती है। जिसमें एक दो नहीं बल्कि अनेकों कक्ष मौजूद हों ताकि वह अपने Coaching Center के माध्यम से एक समय में एक से अधिक कक्षाओं के विद्यार्थियों को एक से अधिक विषय में कोचिंग देने में सक्षम हो सके।       

3. कोचिंग सेण्टर के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure for Coaching Center)

जब उद्यमी द्वारा उचित लोकेशन का चुनाव कर लिया जाता है तो उसके बाद उसे वहां पर उपलब्ध इंफ्रास्ट्रक्चर को चेक करने की आवश्यकता होती है। हालांकि पहले से मौजूद इंफ्रास्ट्रक्चर के तौर पर उद्यमी को कुछ खाली कमरे एवं उनमें पंखे इत्यादि लगे हुए मिल सकते हैं। जबकि विद्यार्थियों के बैठने का प्रबंध करने के लिए बेंच, टेबल, वाइटबोर्ड, ब्लैकबोर्ड, कंप्यूटर, प्रोजेक्टर इत्यादि की व्यवस्था उद्यमी को खुद ही करनी होती है।

इसके अलावा विद्यार्थियों को नियमित तौर पर Center में आने की आवश्यकता होती है इसलिए उनकी व्यक्तिगत चीजों को रखने का भी उचित प्रबंध होना अति आवश्यक है। जैसे यदि कोई बैग लेके आ गया तो वह उसे कक्षा में न ले जाकर कहाँ रख सकता है? कोई बाइक लेकर आ गया तो उसकी पार्किंग की व्यवस्था करना इत्यादि भी बेहद जरुरी है। हालांकि जो उद्यमी पहले से स्कूल चला रहे हैं वे अपने स्कूल में ही स्कूल समय के बाद कोचिंग देना शुरू कर सकते हैं।     

4. लाइसेंस एवं रजिस्ट्रेशन (License for Coaching center)

छोटे स्तर पर इस तरह का बिजनेस शुरू करने के लिए किसी भी प्रकार के लाइसेंस एवं रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता नहीं होती है। शुरूआती दौर में जब उद्यमी का व्यापार नया होता है तब उसका टर्नओवर भी कुछ खास नहीं होता है तो ऐसे में वह एक व्यक्तिगत व्यक्ति के तौर पर बिना किसी लाइसेंस एवं रजिस्ट्रेशन के शुरू कर सकता है।

लेकिन जैसे जैसे उद्यमी का टर्नओवर बढ़ता जायेगा वैसे वैसे टैक्स रजिस्ट्रेशन एवं ट्रेड लाइसेंस की अनिवार्यता भी बढती जाएगी। कहने का आशय यह है की टर्नओवर की एक सीमा को पार कर देने के बाद उद्यमी को ट्रेड लाइसेंस एवं टैक्स रजिस्ट्रेशन दोनों की आवश्यकता होगी। लेकिन इन सबके बावजूद उद्यमी को स्थानीय नियमों एवं कानूनों के बारे में अवश्य पता करना चाहिए।     

5. स्टाफ एवं अध्यन सामग्री (Study material & teachers)

उद्यमी को अपने कोचिंग सेण्टर के लिए स्टाफ नियुक्त करते समय सावधान एवं सचेत रहने की आवश्यकता होती है। क्योंकि उद्यमी के बिजनेस का पूरा दारोमदार इन्हीं फैकल्टी स्टाफ पर निर्भर करेगा । इसलिए संभव एवं बजट हो तो उद्यमी को किसी ऐसे फैकल्टी स्टाफ की नियुक्ति करने का विचार करना चाहिए जिसका उस एरिया में अच्छी तरह पढ़ाने के लिए नाम जाना जाता हो।

क्योंकि बच्चे अक्सर उसी अध्यापक से ट्यूशन या कोचिंग लेना पसंद करते हैं जो उनके विषय सम्बन्धी सभी सवालों का जवाब देने में सक्षम हों। इसलिए जिस स्टाफ की नियुक्ति जिस भी विषय को पढ़ाने के लिए की जा रही हो वह उस विषय का पूर्ण ज्ञाता हो यह आवश्यक है। उद्यमी के Coaching Center की सफलता या असफलता इसी बात पर निर्भर करेगी की वह अपने सेण्टर के माध्यम से गुणवत्तायुक्त शिक्षा दे पाता है या फिर नहीं।

जब बच्चों को लगेगा की उन्हें हर चीज को अच्छे ढंग से पढाया एवं समझाया जा रहा है तो वे आपके व्यपार की मार्केटिंग स्वयं ही करेंगे और इस क्षेत्र में आपको एक विशिष्ट स्थान दिलाने में सहायक होंगे। जहाँ तक अध्यन सामग्री का सवाल है उद्यमी को अपने स्टाफ के अनुसार सामग्री का प्रबंध करने की आवश्यकता होती है ताकि वे अपनी अपनी शैली में विद्यार्थियों को पढ़ाने में सक्षम हो सकें।        

6. शुल्क निर्धारित करें (Determine Fees)

जैसा की हम सब अच्छी तरह से जानते हैं की आज कोई भी उद्यमी कुछ भी व्यापार शुरू करे लेकिन उसमें पहले से ही इतनी प्रतिस्पर्धा है की उद्यमी को उस क्षेत्र में जमे रहने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। यह भी एक ऐसा ही व्यापार है जिसमें कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिलती है और इस प्रतिस्पर्धात्मक माहौल में शुरूआती दौर में ग्राहकों को आकर्षित करने का केवल एक ही उपाय है। की अपनी सेवाएँ प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले कुछ कम कीमत में मुहैया करायी जाएँ और एक बार जब आपका आपके काम को लेकर नाम हो जाता है।

फिर आपको कम कीमत पर सेवाएँ बेचने की आवश्यकता इसलिए नहीं होती क्योंकि ग्राहक आपके काम से परिचित हो चुके होते हैं। इसलिए इस व्यापार के शुरूआती दौर में यदि उद्यमी कोचिंग सेण्टर द्वारा ली जाने वाली फीस प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले कम ही रखे तो उससे ज्यादा ग्राहक जुड़ने की संभावना है।   

7. कोचिंग सेण्टर को प्रमोट करें (Promote Your Coaching Center )

यद्यपि इसमें कोई दो राय नहीं की यदि उद्यमी स्वयं या फिर उसके द्वारा नियुक्त किया गया स्टाफ विद्यार्थियों की नज़र में अच्छे टीचर के तौर पर उभरकर सामने आते हैं। तो ये वही बच्चे होते हैं जो उद्यमी के इस व्यापार की मार्केटिंग स्वयं ही कर देते हैं क्योंकि उन्हें अपने घर परिवार, नाते रिश्तेदार, गली मोहल्ले इत्यादि के बच्चों को भी उनके Coaching Center के बारे में बताना पड़ता है। इसके अलावा यदि उद्यमी के सेण्टर में पढ़ने वाले बच्चों में से कोई बच्चा विशेष स्थान प्राप्त कर गया तो उद्यमी उसे अपने व्यापार को प्रमोट करने के इस्तेमाल में ला सकता है। इन सबके अलावा और भी टिप्स हैं जिनकी लिस्ट कुछ इस प्रकार से है।

  • उद्यमी स्थानीय समाचार पत्र में अपने कोचिंग सेण्टर का विज्ञापन दे सकता है जिससे अधिक से अधिक लोगों को उसके व्यापार के बारे में पता चल सके।
  • एक छोटी सी विडियो बनाकर स्थानीय केबल ऑपरेटर को दी जा सकती है और इसे लोकल चैनल पर दिखाने को बोला जा सकता है।
  • उद्यमी चाहे तो अपने Center के पम्फलेट उस एरिया में स्थित स्कूलों में जाकर बाँट सकता है।
  • विद्यार्थियों को फ्री डेमो क्लास के लिए भी आमंत्रित किया जा सकता है।
  • उद्यमी फेसबुक, इन्स्टाग्राम, यूट्यूब इत्यादि के माध्यम से भी अपने व्यापार को प्रमोट कर सकता है। 
पढ़ाने के लिए टीचर कहाँ से लाएँ?

स्कूल, कॉलेज में पढ़ा रहे टीचरों से संपर्क करें, स्कूल कॉलेज बंद होने के बाद वे आपके Coaching Center में पढ़ा सकते हैं।

कोचिंग सेण्टर खोलने के लिए खुद का टीचर होना जरुरी है?

बिलकुल नहीं। आप अपने कोचिंग सेण्टर में टीचर नियुक्त कर सकते हैं, जिन्हें आपको मासिक वेतन या घंटों के आधार पर भुगतान करना होता है।    

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