Baby Diaper बनाने का बिजनेस शुरू करके भी कर सकते हैं, बम्पर कमाई।

Baby Diaper से तो शायद सभी लोग अच्छी तरह से वाकिफ होंगे वह इसलिए क्योंकि भले ही वे कुंवारे हों और उनके खुद के बच्चे न हो लेकिन जिस समाज एवं रिश्तेदारी में वे रहते हैं। वहाँ उन्होंने अनेकों बार बच्चों को शायद अपनी गोद में खिलाया भी होगा। इसलिए लगभग हर वयस्क व्यक्ति को इस बात की जानकारी होती है की वर्तमान में बच्चों के माता पिता द्वारा उन्हें डायपर पहनाये जाते हैं ताकि उनके शरीर से निकलने वाले तरल जैसे मल मूत्र इत्यादि से कपड़े गंदे न हों।

और यात्रा के दौरान या घर के जिस कोने में बच्चा खेल रहा है वहां ओपर गंदगी न हो। वैसे देखा जाय तो प्राचीनकाल में माता पिता द्वारा बच्चों Baby Diaper का इस्तेमाल नहीं किया जाता था और उनका बच्चों को सँभालने का तरीका भी उनकी जीवनशैली के आधार पर अलग हुआ करता था। लेकिन वर्तमान में जब जीवनशैली एवं रहन सहन में बदलाव होने लगा है तो बच्चों को डायपर पहनाना एक जरुरत बन गई है।

हालांकि वर्तमान में शहरों में तो लगभग हर बच्चे को डायपर पहनाया जाता है लेकिन ग्रामीण इलाकों में आज भी एक बड़ा तबका ऐसा है जो पारम्परिक तरीकों से ही बच्चों द्वारा त्यागे गए मल मूत्र की सफाई करता है। हालांकि Baby Diaper इस्तेमाल न करने के पीछे एक बड़ा कारण लोगों की इस पर खर्च करने की क्षमता भी हो सकती है आम तौर पर एक बच्चे के लिए एक दिन में इस काम पर 20-30 रूपये खर्च करने की आवश्यकता हो सकती है।

baby diaper banane ka business
baby diaper banane ka business

इसलिए ऐसे लोग बच्चों को यात्रा के दौरान या घर से बाहर निकलते वक्त ही डायपर पहनाना पसंद करते हैं। और इसमें भी कोई दो राय नहीं की जैसे जैसे लोगों की आमदनी बढ़ रही है और उन्हें  इसके फायदों के बारे में पता चल रहा है वैसे वैसे डायपर का इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है। इसलिए भारत की घरेलू मार्किट में ही डायपर की मांग निरन्तर बढती जा रही है।

Baby Diaper Manufacturing Business क्या है?

डिस्पोजेबल Baby Diaper की यदि हम बात करें तो यह छोटे बच्चों को सँभालने के लिए आधुनिक दुनिया में एक बहुत बड़ी सुविधा है। इस तरह के डिस्पोजेबल डायपर में एक शोषक पैड होता है जो की नॉन वोवन कपड़े की दो शीटों के बीच लगा हुआ होता है। इस पैड को खास तौर पर शरीर से निकलने वाले तरल पदार्थों को अवशोषित करने के लिए डिजाईन किया गया होता है। इस प्रकार से इसे ऐसे आकार में तब्दील किया जाता है ताकि इससे किसी प्रकार का कोई रिसाव न हो।

Disposable Baby Diaper को अनेकों चरण की प्रक्रिया को पूर्ण करने के पश्चात तैयार किया जाता है। जिसमें शोषक पैड को वैक्यूम करके थोड़ा फुलाया जाता है उसके बाद इसे कपड़े की शीट से जोड़ दिया जाता है।

उसके बाद इन सभी अवयवों को अल्ट्रासोनिक हीट प्रक्रिया के तहत जोड़ा जाता है डायपर के किनारों पर इलास्टिक का भी इस्तेमाल किया जाता है ताकि रिसाव को एकदम से रोका जा सके। कहने का आशय यह है की जब कोई उद्यमी इस तरह के उत्पाद का निर्माण करके उसे मार्किट में बेच रहा होता है तो उसके द्वारा किया जाने वाला यह बिजनेस Disposable Baby Diaper Manufacturing Business कहलाता है।

मार्किट दृष्टिकोण (Market Outlook for Baby Diaper):

एक आंकड़े के मुताबिक भारत में डायपर की मार्किट पिछले सात वर्षों से 20% CAGR के साथ आगे बढ़ रही है। यद्यपि यह हेल्थी ग्रोथ रेट अनेकों कारकों पर निर्भर है लेकिन जो एक मुख्य कारक है वह यह है की भारत में प्रति वर्ष लाखों बच्चों का जन्म होता है। इसके अलावा लोगों की डिस्पोजेबल आय बढती जा रही है और लोगों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता काफी बढ़ी है। लेकिन इन सबके बावजूद भारत में अन्य विकसित बाज़ारों की तुलना में Baby Diaper इस्तेमाल में लाने की दर काफी कम है।

यही कारण है की इस व्यवसाय से जुड़े विनिर्माणकर्ताओं का मानना है की भारत आने वाले समय में दुनिया में डिस्पोजेबल डायपर का एक बहुत बड़ा बाजार बन सकता है। यही कारण है की लोगों को इस व्यवसाय में उम्मीदें दिखने लगी है और वे लगातार इस उत्पाद को और बेहतर एवं किफायती बनाने के लिए प्रयासरत हैं।

बेबी डायपर के निर्माण में इस्तेमाल में लाये जाने वाले कच्चे माल के आधार पर इन्हें अल्ट्रा एब्जोरबेंट डिस्पोजेबल डायपर, रेगुलर डिस्पोजेबल डायपर, सुपर एब्जोरबेंट डायपर, बायो डिग्रेडेबल डिस्पोजेबल डायपर इत्यादि श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है। स्वास्थ्य देखभाल में बढ़ते व्यय एवं लोगों की बढती डिस्पोजेबल आय ने डायपर की मांग को काफी बढ़ा दिया है।

इसके अलावा स्वच्छता बनाये रखने की आदत एवं बच्चों की त्वचा को चकत्ते इत्यादि से बचाना भी Baby Diaper की मांग को बढ़ाने वाले प्रमुख कारक हैं। बढती जन्म दर, तेजी से हो रहे शहरीकरण, विकासशील देशों की आर्थिक स्थितियों में सुधार इत्यादि ने भी बेबी डायपर उद्योग को बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभाई है।   

बेबी डायपर बनाने का बिजनेस कैसे शुरू करें? (How to Start a Baby Diaper Manufacturing Business) 

हालांकि इसमें कोई दो राय नहीं की Baby Diaper Manufacturing Business  को शुरू करने में सबसे बड़ा एवं महंगा संसाधन बेबी डायपर बनाने वाली मशीन है। बाजार में इस तरह का कार्य करने के लिए अनेकों मशीन उपलब्ध हैं लेकिन ध्यान रहे उनकी कीमत उनकी क्षमता के आधार पर लाखों रुपयों से लेकर करोड़ों तक में हो सकती है।

इसलिए जो भी व्यक्ति इस तरह का यह व्यवसाय शुरू करने की सोच रहा हो उसे अपने व्यवसाय पर करोड़ों रूपये तक खर्च करने की आवश्यकता हो सकती है। कहने का आशय यह है की इस व्यवसाय को केवल वही लोग शुरू कर सकते हैं जिनकी वित्तीय स्थिति बेहद अच्छी हो और वे लाखों, करोड़ों रूपये का निवेश करने के लिए समर्थ हों। तो आइये जानते हैं की कैसे कोई व्यक्ति खुद का Baby Diaper Manufacturing Business शुरू कर सकता है।

1. प्लांट के लिए जगह का चयन  करें

उद्यमी को जगह का चयन भी मशीनरी के आकार,क्षमता इत्यादि को ध्यान में रखकर ही करनी होगी इसलिए कम से कम उद्यमी को 700-1200 Square Feet जगह की आवश्यकता तो होगी ही होगी। वह इसलिए क्योंकि उद्यमी को कच्चा माल रखने के लिए स्टोर, तैयार माल रखने के लिए स्टोर, काम करने की जगह, ऑफिस के लिए जगह इत्यादि की भी आवश्यकता होगी।

उद्यमी अपनी फैक्ट्री के लिए मुख्य बाजार से 10-20 किलोमीटर के रेडियस में कहीं भी जगह ढूंढ सकता है। लेकिन वहां पर आधरभूत सुविधाओं जैसे बिजली, पानी, सड़कों इत्यादि का अभाव न हो ताकि उद्यमी को अपने उत्पाद को मार्किट तक पहुँचाने में किसी प्रकार की कोई दिक्कत का सामना न करना पड़े। इसके अलावा किराये पर ली गई जगह का लीज एग्रीमेंट या रेंट एग्रीमेंट अवश्य बना लेना चाहिए।      

2. आवश्यक लाइसेंस एवं रजिस्ट्रेशन प्राप्त करें

उद्यमी चाहे तो शुरूआती दौर में अपने Baby Diaper Manufacturing Business को प्रोप्राइटरशिप के तौर पर भी रजिस्टर करा सकता है। यह इसलिए क्योंकि इसके तहत व्यवसाय का रजिस्ट्रेशन आसानी से हो जाता है और उद्यमी को विभिन्न औपचारिकतायें जो किसी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी खोलने के लिए करनी पड़ती हैं वह नहीं करनी पड़ती। यहाँ तक की कुछ राज्यों में इस तरह का यह रजिस्ट्रेशन ऑनलाइन ही हो जाता है और उद्यमी को किसी भी सरकारी दफ्तर के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं होती है।

इसके अलावा उद्यमी को स्थानीय प्राधिकरण जैसे नगर निगम इत्यादि से ट्रेड लाइसेंस लेने की आवश्यकता होती है तो वहीँ टैक्स रजिस्ट्रेशन, बैंक में चालू खाता, पोल्यूशन डिपार्टमेंट से नॉन ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट, उद्योग आधार रजिस्ट्रेशन, एमएसएमई डाटा बैंक रजिस्ट्रेशन, ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन  इत्यादि की आवश्यकता भी हो सकती है।   

3. कच्चे माल एवं मशीनरी की खरीदारी करें

लाइसेंस, परमिशन एवं रजिस्ट्रेशन से सम्बंधित सभी प्रक्रियाएं सफलतापूर्वक पूर्ण होने के बाद उद्यमी का अगला कदम कच्चे माल एवं मशीनरी की खरीदारी का होना चाहिए। लेकिन Baby Diaper Manufacturing Business करने वाले उद्यमी को एक बात का विशेष ध्यान रखना होगा की वह मशीनरी एवं कच्चे माल की खरीदारी से पहले विभिन्न सप्लायर से कोटेशन मंगवा ले और फिर उनका तुलनात्मक विश्लेषण करने के पश्चात ही इस बात का निर्णय ले की उसे किस सप्लायर से मशीनरी एवं कच्चा माल खरीदना चाहिए।

सप्लायर ढूँढने के लिए उद्यमी चाहे तो विभिन्न ऑनलाइन पोर्टल जैसे ट्रेडइंडिया, इंडियामार्ट, क्लिक इंडिया, जस्ट डायल इत्यादि की मदद भी ले सकता है। चूँकि इस व्यवसाय में काम आने वाली मशीन की कीमत उसके उत्पादन क्षमता के आधार पर अलग अलग हो सकती है। इसलिए उद्यमी को चाहिए की सर्वप्रथम वह अपने बजट के मुताबिक मशीनरी का चुनाव कर ले और फिर उसके पश्चात उसी मशीन की कोटेशन सभी सप्लायर से मंगाए।

ताकि उसे बाद में तुलना करने में आसानी रहे। और जहाँ तक कच्चे माल की बात है Baby Diaper Manufacturing Business में प्रमुख तौर पर पल्प, सुपर एबजोरबेंट पॉलीमर, टिश्यू, चिपकाने वाला पदार्थ जैसे गोंद, इलास्टिक इत्यादि का इस्तेमाल किया जाता है। चूँकि यह बार बार इस्तेमाल में लायी जाने वाली सामग्री होगी इसलिए उद्यमी चाहे तो इसके लिए किसी स्थानीय सप्लायर का भी चयन कर सकता है ।    

4. डायपर का निर्माण शुरू करें

जैसा की हम पहले भी बता चुके हैं की Baby Diaper का निर्माण विभिन्न प्रक्रियाओं के माध्यम से किया जाता है। जहाँ सर्वप्रथम एब्जोरबेंट पैड को फुलाया जाता है ताकि यह अधिक सुरक्षित बन सके। उसके बाद इसे नॉन वोवन कपड़े की टॉप शीट एवं बॉटम शीट से अटेच कर दिया जाता है। उसके बाद अल्ट्रासोनिक वाइब्रेशन या हीट प्रक्रिया के माध्यम से इन घटकों को सील कर दिया जाता है। और डायपर के ईधर उधर से रिसाव न हो इसके लिए इसके किनारों पर इलास्टिक लगायी जाती है जो डायपर को टांगों कमर इत्यादि पर चिपकाये रहती है और कहीं से भी रिसाव नहीं होता है।

और जब डायपर पूर्ण रूप से फिट हो जाता है तो यह बच्चों द्वारा त्यागे गए तरल का रिसाव होने बचाता है और तब तक इसमें लगे शोषक पदार्थ उस तरल को शोख लेते हैं। कहने का आशय यह है की सभी प्रकार की प्रक्रियाएं पूर्ण होने के बाद अब उद्यमी को डायपर का निर्माण शुरू कर देना चाहिए और ध्यान रहे गुणवत्ता में किसी प्रकार का कोई समझौता नहीं किया जाना चाहिए।      

6. मार्केटिंग एवं बिक्री करके कमाएँ

Baby Diaper Manufacturing Business की एक अच्छी बात यह है की उद्यमी को अपने टारगेट कस्टमर को पहचानने के लिए कोई अधिक मेहनत करने की आवश्यकता नहीं होती। जिस घर में छोटे बच्चे हों वही घर उद्यमी का संभावित ग्राहक हो सकता है इसलिए जहाँ तक मार्केटिंग का सवाल है उद्यमी को अपने उत्पाद की मार्केटिंग विभिन्न प्रकार के ऑनलाइन, इलेक्ट्रॉनिक, ऑफलाइन तरीकों के माध्यम से करना चाहिए लेकिन चूँकि शुरूआती दौर में उद्यमी के पास मार्केटिंग में खर्च करने को शायद ही अधिक बजट होगा।

इसलिए उसका प्रमुख लक्ष्य इस बात पर होना चाहिए की वह अपने उत्पाद को बाजार में कैसे बेच पायेगा। इसके लिए उद्यमी को परचून की दुकानों, अन्य रिटेल स्टोर, मेडिकल स्टोर में जाकर अपने उत्पाद के बारे में बताना होगा और शुरुआती दौर में उन्हें किसी योजना या आधिक कमीशन का लालच देना होगा ताकि वे उद्यमी के उत्पाद को बेचने में अधिक रूचि दिखाएँ।

अन्य भी पढ़ें  

सेनेटरी नैपकिन बनाने का व्यापार कैसे शुरू करें.

बॉडी लोशन निर्माण बिजनेस कैसे शुरू करें.

error: Content is protected !!