मशरूम की खेती का व्यापार कैसे करें। Mushroom Farming in Hindi.

वर्तमान में Mushroom Farming नामक यह व्यवसाय कमाई की दृष्टी से बेहद ही उपयुक्त माना जाता है। एक समय था जब सभी लोग कृषि सम्बन्धी कार्यों को करके ही अपनी आजीविका चलाते थे। फिर एक समय आया की पढ़े लिखे या शिक्षित लोग उद्योगों में कार्य करने के लिए शहरों की तरफ पलायन कर गए। और कृषि सम्बन्धी कार्यों की जिम्मेदारी ग्रामीण इलाकों में अशिक्षित या कम पढ़े लिखे लोगों पर आ गई।

और इसमें कोई दो राय नहीं की उन्होंने अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाई यद्यपि कृषि सम्बन्धी व्यवसायों को पहले पढ़े लिखे या शिक्षित वर्ग द्वारा वरीयता नहीं दी जाती थी। लेकिन वर्तमान परिदृश्य में काफी बदलाव हो गया है और अनेकों शिक्षित एवं कौशल से परिपूर्ण उद्यमी अनेकों तरह के फार्मिंग बिजनेस सफलतापूर्वक कर रहे हैं। और बहुत सारे उद्यमी इस तरह के व्यापारों को शुरू करने की रूचि भी रख रहे हैं।

इसलिए आज हम हमारे इस लेख के माध्यम से मशरूम की खेती के व्यापार के बारे में उचित जानकारी देने का प्रयत्न कर रहे हैं। ताकि कोई भी उद्यमी इस बिजनेस को शुरू करके अपनी कमाई कर पाने में सक्षम हो ।

Mushroom Farming Business in Hindi

मशरुम की खेती क्या है (What is Mushroom Farming)

यह क्या है पर बात करने से पहले यह बेहद जरुरी हो जाता है की हम सबसे पहले यह जान लेन की मशरुम क्या है। अर्थात बहुत सारे लोगों को लगता है की मशरुम या तो कोई वनस्पति होगी या फिर कोई पौधा होगा। लेकिन सच्चाई यह है की मशरुम न तो कोई वनस्पति होती है और न ही ये कोई पौधे होते हैं। लेकिन इसके बावजूद इन्हें पौधों के करीबी के तौर पर जाना जा सकता है।

मशरुम की बात करें तो इन्हें कवक या फुंगी कह सकते हैं। यह कवक लोगों के बीच एक स्वास्थ्यवर्धक आहार के तौर पर काफी प्रसिद्ध है इसलिए खाने में इसका इस्तेमाल होटलों से लेकर घरों तक अनेकों स्वादिष्ट डिशों को बनाने में किया जाता है। चूँकि यह स्वास्थ्यवर्धक होने के साथ साथ स्वादिष्ट भी होता है इसलिए इसकी माँग बाज़ारों में हमेशा विद्यमान होती है।

वर्तमान में हमें भारत में भी ऐसे अनेकों उदाहरण देखने को मिल जायेंगे जिन्होंने मशरूम की खेती से न सिर्फ कमाई की है बल्कि वे औरों के लिए भी एक प्रेरणास्रोत बनकर सामने आये हैं। व्यवसायिक तौर पर लोगों की मशरुम की माँग को देखते हुए किया जाने वाला मशरुम उत्पादन ही मशरुम फार्मिंग कहलाता है।

मशरुम की खेती के लाभ (Benefits of mushroom farming) 

  • भारत में मशरुम उगाने की लागत बेहद कम है अर्थात इसे उद्यमी बेहद कम निवेश के साथ उगा सकता है।
  • इस खेती की खूबियाँ यह है की इसे किसी भी मौसम एवं किसी भी जलवायु में शुरू किया जा सकता है। अर्थात मशरुम का उत्पादन करने के लिए किसी खास मौसम एवं जलवायु की आवश्यकता नहीं होती है।
  • यद्यपि इस तरह के काम के लिए कम मजदूरों की आवश्यकता होती है और जिनकी आवश्यकता होती है वे बेहद कम दरों पर ग्रामीण इलाकों में मिल भी जाते हैं।
  • मशरुम की मांग घरेलु बाजार में ही नहीं अपितु विदेशी बाज़ारों में भी लगातार बढती जा रही है यही कारण है की इनकी बिक्री में कोई अधिक परेशानी नहीं होती है।
  • चूँकि मशरुम में विटामिन डी की पर्याप्त मात्रा होती है इसलिए इन्हें इसकी कमी पूरा करने के इस्तेमाल में भी लाया जा सकता है।
  • एक आंकड़े के मुताबिक मशरुम का सेवन स्तन कैंसर एवं प्रोस्टेट कैंसर को भी रोकता है।
  • मशरुम के उत्पादन के लिए ज्यादा जमीन की आवश्यकता नहीं होती उद्यमी इसे एक दो कमरों से भी शुरू कर सकता है।
  • मशरूम फार्मिंग को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य एवं केंद्र सरकार द्वारा अनेकों योजनायें चलाई गई हैं जिनका उद्देश्य उद्यमियों को सब्सिडीयुक्त ऋण उपलब्ध कराना है।
  • धान की खेती करने वाले किसानों के लिए मशरुम की खेती करना बेहद लाभदायक एवं सस्ता हो सकता है क्योंकि धान के भूसे एवं घास का इस्तेमाल मशरुम उगाने के लिए किया जा सकता है।

मशरुम की खेती कैसे शुरू करें (How to Start Mushroom Farming in Hindi)

कोई भी व्यक्ति या किसान जो जो मशरूम की खेती शुरू करने की सोच रहा हो उसे सर्वप्रथम यह जानने की आवश्यकता होती है। की मशरुम उगाने के लिए उसे कम से कम कितनी जमीन, कितने लोग एवं कितने कमरों की आवश्यकता हो सकती है ।  इसके अलावा यह कवक कैसे उगाये जाते हैं, कब उगाये जाते हैं और इनके लिए कम्पोस्ट इत्यादि का निर्माण कैसे किया जाता है ।   

सभी प्रकार की जानकारी होना अति आवश्यक है चूँकि मशरुम के भी विभिन्न प्रकार जैसे ओएस्टर एवं बटन इत्यादि हो सकते हैं इसलिए कब किस प्रकार के मशरुम उगाये जा सकते हैं। इसकी जानकारी होना भी नितांत आवश्यक है। तो आइये जानते हैं की कैसे कोई इच्छुक व्यक्ति इसे शुरू कर सकता है।

1. प्रशिक्षण प्राप्त करना (Get Training of Mushroom Farming)

जैसा की हम उपर्युक्त वाक्य में भी बता चुके हैं की यदि कोई व्यक्ति यह बिजनेस शुरू करना चाहता है। तो उसे इस व्यापार के सम्बन्ध में बहुत सारी तकनिकी एवं प्रबंधकीय जानकरियां लेने की आवश्यकता होती है । इसलिए बेहतर तो यही है की उद्यमी को किसी सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थान से कुछ दिनों का प्रशिक्षण लेकर ही इस बिजनेस को शुरू करना चाहिए। हालांकि ऐसे उद्यमी जो पहले से इस तरह का बिजनेस कर रहे हैं वे भी भावी उद्यमियों को प्रशिक्षण ऑफर करते हैं।

इसलिए जो व्यक्ति यह बिजनेस करने की सोच रहा हो यदि उसके आस पास या जानकारी में ऐसा कोई हो जो पहले से सफलतापूर्वक इस बिजनेस को कर रहा हो। तो वह वहां जाकर भी कुछ दिनों की ट्रेनिंग ले सकता है। और सीख सकता है की मशरुम का उत्पादन करने के लिए क्या क्या गतिविधियाँ कैसे कैसे की जाती हैं । कहने का आशय यह है की ऐसे व्यक्ति जो मशरुम की खेती करना चाहते हों उन्हें सर्वप्रथम इसकी सम्पूर्ण जानकारी लेने के लिए ट्रेनिंग लेने की आवश्यकता हो सकती है।

जमीन एवं कमरे तैयार करना (Prepare room for mushroom farming)

वैसे देखा जाय तो उद्यमी शुरूआती दौर में बेहद कम जमीन के साथ भी इसे शुरू कर सकता है । चूँकि जैसा की हम सबको विदित है की मशरुम की खेती खुले आसमान के नीचे नहीं होती है। बल्कि इसके लिए किसानों द्वारा अपनी जमीन पर छप्पर बनाये जाते हैं।

इसलिए ऐसे लोग जिनके पास खाली जमीन है वे वहां पर कुछ छप्परों का निर्माण करके इस व्यवसाय को शुरू कर सकते हैं और जिनके पास खाली कमरे उपलब्ध हैं लेकिन उनका कोई इस्तेमाल नहीं है। तो ऐसे कमरों को मशरुम की खेती करने के इस्तेमाल में लाया जा सकता है। यदि आप भी यह बिजनेस शुरू करने की सोच रहे हैं तो आपके पास आपकी जमीन या खाली कमरे होने नितांत आवश्यक हैं।    

3. हैंगिंग मेथड या रैकिंग मेथड ( Mushroom Farming Method)

मशरूम की खेती में हैंगिंग एवं रैकिंग मेथड दोनों का महत्वपूर्ण स्थान है क्योंकि उद्यमी इन दोनों में से जिस भी विधि से इनकी खेती करना चाहता हो। उसे उसके अनुरूप ही कमरों के अन्दर निर्माण कार्य पूर्ण करना होगा। जैसा की हम सबको विदित है की जिन प्लास्टिक की थैलियों में मशरुम की बुआई की जाती है उन्हें कमरे के अन्दर धरती पर नहीं रखा जा सकता है। यही कारण है की इन प्लास्टिक बैगों को इन दो पद्यतियों में से किसी एक पद्यति को अपनाकर कमरों में रखा जा सकता है।

जहाँ तक हैंगिंग मेथड की बात है इसमें कमरों की आमने सामने वाली दीवारों पर लकड़ी की गिट्टियां मजबूती से ठोक दी जाती हैं और उनके ऊपर बांस की लकड़ियों को दो दो फीट के अंतर में सटा दिया जाता है। और उसके बाद इन बांस की लकड़ियों में एक निश्चित अंतर रखते हुए रस्सी फंसा दी जाती है। रस्सी के चार पलड़ों को नीचे छोड़कर निश्चित दूरी पर गाँठ बाँध ली जाती है। गांठे कितनी बाँधी जाएगी यह कमरे की ऊंचाई पर निर्भर करता है। छोड़े गए चार पलड़ों के सहारे मशरुम बैग को लटका दिया जाता है।

यह प्रक्रिया एक निश्चित दूरी पर बार बार दोहराई जाती है। और जहाँ तक रैकिंग पद्यति का सवाल है इस पद्यति में तख्तों या बांस की चौड़ी लकड़ी को जमीन से लगभग सात आठ इंच ऊपर से शुरू करके निश्चित दूरी पर तिरछा बिछा लिया जाता है। जिससे ये रैक की तरह नज़र आते हैं फिर इनके ऊपर मशरुम के बैग रखकर मशरुम का उत्पादन किया जाता है। इसलिए उद्यमी को इन दोनों में से जिस भी पद्यति से यह खेती करनी हो । वह पहले ही इनका चुनाव करके कमरों को उसी तरह से तैयार कर सकता है ।

4. भूसे एवं कम्पोस्ट का प्रबंध (Straw & Compost arrangement)

जैसा की हम पहले भी बता चुके हैं की मशरूम फार्मिंग करने के लिए गेहूं के भूसे, धान के भूसे इत्यादि की आवश्यकता होती है।  इस घर को बिजाई करते वक्त मशरुम बैग के ऊपर से डाला जाता है ताकि फंफूंद या कवक जल्दी से पैदा हों।  लेकिन भूसे को इस्तेमाल में लाने से पहले इसके शुद्धिकरण की प्रक्रिया को अंजाम दिया जाता है। भूसे को शुद्ध करने के लिए डेजियम नामक रसायन के साथ पानी से अच्छी तरह एक हौदी बनाकर धोया जाता है।  

हालांकि कितने पानी में इसकी कितनी मात्रा मिलाई जाती है इसकी राय उद्यमी को प्रशिक्षण के दौरान दी जा सकती है। लेकिन यदि फिर भी उद्यमी को इसका अनुमान नहीं हो पा रहा है तो वह राज्य के कृषि विभाग से जुड़े वैज्ञानिकों से इस बारे में जानकारी प्राप्त कर सकता है। भूसे का शुद्दिकरण करने में काफी सावधानियाँ बरती जाती हैं और इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है की भूसे के साथ कोई ऐसे जीवाणु, विषाणु न जाने पायें जो मशरुम को नुकसान पहुंचाएं।

शुद्धिकरण की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद भूसे को सुखाया जाता है इसे प्राकृतिक रौशनी जैसे धुप में आसानी से सुखाया जा सकता है। लेकिन इस भूसे को हर एक दो घंटे में पलटने की आवश्यकता होती है ताकि भूसे का कोई भी हिस्सा गिला न रहे।  भूसे को सूखने में दो दिनों तक का समय लग सकता है।

जहाँ तक कम्पोस्ट का सवाल है इसे उद्यमी नारियल के बुरादे यानिकी नारियल छिलते वक्त जो कोको पीट निकलता है उसके एवं लगभग डेढ़ साल पुराने गोबर के साथ मिलकर तैयार कर सकता है। इसमें ध्यान देने वाली बात यह है की कम्पोस्ट बनाने में 80% तक गोबर का इस्तेमाल होता है। इसमें भी लगभग 5% फोर्मलिन नामक एक रसायन मिलाया जाता है ताकि इस कम्पोस्ट के साथ मशरुम को हानि पहुँचाने वाले जीवाणु, विषाणु नहीं जा सकें।             

5. स्पान की बिजाई करना (Spawning)

हालांकि यहाँ पर यह स्पष्ट कर देना बेहद जरुरी है की मिल्की मशरुम एवं ओएस्टर मशरुम की बिजाई करने की पद्यति में थोड़े बहुत अंतर भी हो सकते हैं। इसलिए यह बिजनेस कर रहे उद्यमी को प्रशिक्षण के दौरान जिस तरह से बिजाई करने की पद्यति बताई गई हो उसे उसी का अनुसरण करना चाहिए। मिल्की मशरुम की बिजाई के दौरान प्लास्टिक के बैगों को नीचे से दोनों कोनों से काट लिया जाता है।

यह बिजाई तीन लेयर में करनी होती है मशरुम स्पान के बाद भूसा डालते ही फिर मशरुम स्पान डाल दिए जाते हैं। और पन्नी में छेद भी किये जाते हैं। जहाँ तक ओएस्टर मशरुम की बिजाई का सवाल है इस प्रक्रिया में भूसे को एक स्थान पोअर फैलाकर उसके ऊपर मशरुम स्पान का छिडकाव कर दिया जाता है। छिडकाव के बाद उस भूसे को पलट पलटकर बीज को उसमें अच्छी तरह से मिला लिया जाता है और फिर इस भूसे को प्लास्टिक बैग में गोलाकृति में भर दिया जाता है। इस पन्नी में भी छेद कर दिए जाते हैं ताकि मशरुम इन बैग से बाहर आयें तो टकराएँ नहीं।        

6. कमरों का वातावरण मेन्टेन करना (Maintain room temperature)

यद्यपि हो सकता है की मिल्की मशरुम एवं ओएस्टर मशरुम का उत्पादन करने के लिए कमरों में अलग अलग तरह का वातावरण मेन्टेन करना हो। लेकिन यहाँ पर कुछ सामान्य बातों की चर्चा हम करेंगे जो दोनों तरह की Mushroom Farming के उत्पादन में सहायक होंगे । जब उद्यमी द्वारा मशरुम के बैगों को कमरे के अन्दर रखा जाता है तो उसके 15-20 दिनों तक उस कमरे को चारों तरफ से यहाँ तक की एक छिद्र भी सब कुछ बंद कर देना होता है।

कहने का अभिप्राय यह है की कमरे के खिड़की, दरवाजे, रोशनदान इत्यादि सभी कुछ बंद रखने की आवश्यकता तो होती है। लेकिन साथ में इन पन्द्रह बीस दिनों के तहत नियमित रूप से कमरे का तापमान मापने की भी आवश्यकता होती है। उद्यमी को न सिर्फ कमरे का बल्कि मशरुम बैगों का भी तापमान निरीक्षण करने की आवश्यकता होती है इसके लिए उद्यमी को थर्मामीटर का अग्र भाग बैग के अन्दर डालने की आवश्यकता होती है। हालांकि यदि उद्यमी मिल्की Mushroom Farming शुरू कर रहा हो तो इसके लिए शुरू के 15-20 दिनों में तापमान 25-30 degree मेन्टेन करने की जरुरत होती है, जबकि ओएस्टर मशरुम के उत्पादन के लिए तापमान 30 Degree से ऊपर होना चाहिए।

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