मुर्गी पालन कैसे शुरू करें । Poultry Farming Business Plan in Hindi.

मुर्गी पालन अथवा Poultry Farming प्रचलित एवं प्रसिद्ध पारम्परिक व्यवसायों में से ही एक है। इसलिए अक्सर हम देखते हैं की जिस भी व्यक्ति के मन में कम निवेश के साथ अपना बिजनेस करने का विचार कौंधता है। तो मुर्गी पालन नामक इस व्यवसाय का नाम भी उसमें शामिल होता है। हालांकि बहुत सारे लोगों को लगता है की यह व्यवसाय शुरू करना बेहद आसान है। लेकिन जो इस व्यापार को आसान समझकर बिना किसी योजना के इसे शुरू करते हैं अक्सर वे लोग इस बिजनेस में असफल हो सकते हैं।

यद्यपि इसमें कोई दो राय नहीं है की वर्तमान समय में जब अधिकतर लोग मांसाहारी हैं और मांस एवं अण्डों की मांग घरेलू एवं विदेशी बाज़ारों में भी बहुतायत तौर पर हमेशा विद्यमान रहती है। तो यह व्यवसाय बेहद ही लाभकारी हो सकता है। इसलिए आज हम हमारे इस लेख में इस व्यवसाय को शुरू करने सम्बन्धी कुछ जरुरी जानकारी देने का प्रयास कर रहे हैं।

इस व्यवसाय में लोगों की रूचि इसलिए भी अधिक रहती है क्योंकि इसे शुरू करने के लिए किसी खास कौशल की आवश्यकता नहीं होती है। इसलिए राज्य के कृषि विभाग या अन्य किसी फार्म से कुछ हफ़्तों का प्रशिक्षण प्राप्त करके मुर्गी पालन नामक इस व्यवसाय को कोई भी बेरोजगार चाहे वह शिक्षित हो या अशिक्षित आसानी से शुरू कर सकता है।

Poultry Farming Business in Hindi

मुर्गी पालन कैसे शुरू करें (How to Start poultry farming Business in India)

खुद की आजीविका चलाने के लिए यदि आप यह बिजनेस शुरू करना चाहते हैं, तो यहाँ पर हम उन सभी आवश्यक कदमों के बारे में संक्षेप से बता रहे हैं।

1. प्रशिक्षण प्राप्त करें (Get Training of Poultry Farming)

यदि उद्यमी ने पोल्ट्री फार्मिंग बिजनेस शुरू करने का पक्का इरादा कर लिया हो तो उसे इस व्यापार की चुनौतियाँ एवं कठिनाइयाँ समझने के लिए इसका प्रशिक्षण लेने की आवश्यकता हो सकती है। वर्तमान में बहुत सारे मुर्गी पालन करने वाले उद्यमी नए उद्यमियों को प्रशिक्षण कार्यक्रम ऑफर करते हैं । यद्यपि प्रशिक्षण के बदले उद्यमी को कुछ शुल्क देना होता है।

इसके अलावा कुछ सरकारी विभाग जैसे कृषि विज्ञानं केंद्र एवं खादी ग्रामोद्योग भी इच्छुक व्यक्तियों को इस तरह का प्रशिक्षण देते हैं। प्रशिक्षण लेकर उद्यमी न सिर्फ मुर्गी पालन से समबन्धित तकनीकी एवं व्यवहारिक ज्ञान प्राप्त कर पायेगा बल्कि प्रबंधन सम्बन्धी भी जरुरी जानकारी प्राप्त कर पाने में सक्षम हो पायेगा। जैसा की हम सबको विदित है की वर्तमान में बिजनेस का कोई भी क्षेत्र हो हर क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा व्याप्त है। इसलिए इस तरह का यह बिजनेस शुरू करने के लिए प्रशिक्षण बेहद आवश्यक है।     

2. मुर्गियों का प्रकार चुनें (Select breed for farming)

जहाँ तक मुर्गियों के प्रकार की बात है मुर्गी पालन बिजनेस को शुरू करने वाले व्यक्ति को इस बात का पता करना होगा की वह मुर्गी पालन मांस के उत्पादन के लिए करना चाहता है या फिर अण्डों का उत्पादन करने के लिए। क्योंकि यदि उद्यमी मुख्य रूप से अण्डों के उत्पादन के लिए यह बिजनेस शुरू करना चाहता है तो उसे लेयर मुर्गी फार्म शुरू करने की आवश्यकता हो सकती है। जबकि यदि उद्यमी प्रमुख रूप से मांस का उत्पादन करना चाहता है तो उसे ब्रायलर मुर्गी फार्म खोलने की आवश्यकता होगी।

हालांकि ब्रायलर एवं लेयर मुर्गी फार्म दोनों के अपने अलग अलग लाभ एवं हानियाँ होती हैं जिसके बारे में व्यक्ति को प्रशिक्षण में बताया जा सकता है। कहने का अभिप्राय यह है की मुर्गियों के प्रकार का चुनाव करने से पहले उद्यमी को इनके बारे में पूर्ण एवं अधिकारिक जानकारी प्राप्त करने की आवश्यकता होती है। यद्यपि उद्यमी चाहे तो लेयर एवं ब्रायलर दोनों तरह की मुर्गियों को भी अपने व्यापार का हिस्सा बनाकर अंडे एवं मांस दोनों का उत्पादन कर सकता है।

3. कानूनों का अनुसरण करें (Follow local law & rules)

जैसा की हम उपर्युक्त वाक्य में पहले भी बता चुके हैं की उद्यमी इसे कहीं से भी शुरू नहीं कर सकता है। इसलिए उद्यमी को चाहिए की वह स्थानीय प्राधिकरण के कार्यालय में जाकर यह पता करे की जहाँ पर वह यह बिजनेस करना चाहता है। क्या वह जगह मुर्गी पालन व्यवसाय शुरू करने के अनुकूल है या नहीं।

कहने का अभिप्राय यह है की यदि उद्यमी इस तरह का यह बिजनेस किसी रेजिडेंशियल इलाके में शुरू करेगा तो वहां पर उपलब्ध आस पड़ोसियों को इस बात से ऑब्जेक्शन हो सकता है और वे बाद में उद्यमी की शिकायत स्थानीय शासन, प्रसाशन से कर सकते हैं। इसलिए उद्यमी को यह सुनिश्चित करना होगा की उसके बिजनेस के कारण किसी को कोई असुविधा न हो। इसके अलावा उद्यमी को अपने व्यापार के लिए कर्मचारियों की नियुक्ति के सम्बन्ध में, मुर्गियों को ट्रांसपोर्ट करने के सम्बन्ध में भी स्थानीय नियमों को अनुसरण में लाने की आवश्यकता होती है।      

4. बिजनेस की योजना बनायें (Create Business Plan for Poultry Farming)

यदि उद्यमी ने प्रशिक्षण एवं मुर्गियों का चयन कर लिया हो तो उसके बाद उसे एक बेहद ही प्रभावी बिजनेस प्लान बनाने की आवश्यकता हो सकती है । इस बिजनेस की योजना में उद्यमी को सब कुछ जैसे मुर्गियों का प्रकार क्या होगा, कितनी मुर्गियों से शुरू होगा, कितनी जमीन पर होगा, उनके खाने का प्रबंध कैसे होगा, आवास की व्यवस्था कैसे की जायेगी । कितने कर्मचारियों को काम पर रखा जायेगा और मेच्योर होने पर उन्हें कहाँ बेचा जायेगा ।

टारगेट ग्राहक कौन कौन से हो सकते हैं, फण्ड की व्यवस्था कहाँ कहाँ से हो सकती है, अगले दो सालों में मुर्गी फार्म कहाँ स्थित होगा? इत्यादि सभी बातों पर विचार करके उल्लेख किया जाना चाहिए। इस दस्तावेज में अनुमानित खर्चे से लेकर अनुमानित कमाई का भी विवरण होना नितांत आवश्यक है। ताकि पोल्ट्री फार्मिंग शुरू करने वाला  उद्यमी निर्धारित समय में निर्धारित आर्थिक आंकड़ों को छू पाने में सफल हो सके।   

5. वित्त की व्यवस्था करें (Arrange Finance for Poultry Farming)

अब यदि उद्यमी ने बिजनेस की योजना बना ली होगी तो उद्यमी को उसके व्यापार शुरू करने में आने वाले अनुमानित खर्चे का पता चल गया होगा। इसलिए अब उद्यमी का अगला कदम अपने बिजनेस के लिए वित्त का प्रबंध करने का होना चाहिए। यद्यपि सबसे पहले उद्यमी को अपनी बचत पर ही नज़र डालनी होगी की वह अपनी बचत से कितना पैसा अपने व्यापार में निवेश कर सकता है।

हालांकि इस तरह का यह बिजनेस 7-12 लाख में आसानी से शुरू किया जा सकता है। लेकिन फिर भी यह सब इस बात पर निर्भर करेगा की उद्यमी मुर्गी पालन को किस स्तर पर शुरू करना चाहता है अर्थात बड़े स्तर पर शुरू करने के लिए ज्यादा जमीन, बड़े आवास एवं अधिक पक्षियों को खरीदने की आवश्यकता होगी तो यह लागत बढ़ भी सकती है। बल्कि एक माध्यम स्तर पर यह बिजनेस शुरू करने के लिए उपर्युक्त बताई गई धनराशि पर्याप्त रहेगी।

इसके अलावा अधिकतर राज्यों एवं केंद्र सरकार की योजनाओं में कृषि से सम्बंधित इस तरह के व्यापारों के लिए सब्सिडी लोन भी प्रदान किये जाते हैं। इसकी जानकारी उद्यमी कृषि विज्ञान केंद्र या जिला उद्योग केंद्र अथवा कृषि विभाग से प्राप्त कर सकता है। बहुत सारे निजी एवं सार्वजनिक बैंकों ने भी उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के लिए इस तरह के कार्यक्रम एवं योजनाओं की शुरुआत की है ताकि ऐसे उद्यमियों को आसानी से ऋण प्राप्त हो सके। इसलिए उद्यमी चाहे तो इस काम के लिए वित्त की व्यवस्था अपनी बचत से, रिश्तेदार या परिवार के सदस्यों से, सब्सिडी ऋणों से या फिर बैंक ऋणों के माध्यम से कर सकता है।   

6. पक्षियों के लिए जमीन एवं आवास का प्रबंध:

पक्षियों यानिकी मुर्गियों के लिए लोकेशन एवं जमीन का प्रबंध करना सबसे महत्वपूर्ण कदमों में से एक है। ध्यान रहे उद्यमी इस बिजनेस को कहीं अर्थात किसी रेजिडेंशियल इलाके में बिना आस पड़ोस के लोगों की एनओसी के नहीं शुरू कर सकता। वह इसलिए क्योंकि मुर्गियों से अजीब तरह की दुर्गन्ध आती है जिसे लोग पसंद नहीं करते हैं । इसलिए यदि उद्यमी के पास रिहायशी इलाके से थोड़ी दूर पर कहीं जमीन है तो उद्यमी वहां पर मुर्गी पालन का यह व्यापार शुरू कर सकता है।

हालांकि उद्यमी चाहे तो अपने फार्म द्वारा उत्पादित उत्पाद को वहां उस एरिया में स्थित बाजार के अलावा अन्य बाज़ारों में भी बेचने के लिए भेज सकता है। लेकिन फिर भी उद्यमी को उस एरिया में स्थित पहले से मौजूद फार्म एवं उस एरिया में उपलब्ध मांग का विश्लेषण करने के पश्चात ही लोकेशन एवं जमीन का चुनाव करना बेहतर होता है। जिस जमीन पर उद्यमी यह बिजनेस शुरू करना चाहता है वहां पर सड़क की उपलब्धता, बिजली एवं पानी की भी उचित व्यवस्था होनी चाहिए।

जब उद्यमी द्वारा जमीन का चुनाव कर लिया जाता है तो उसके बाद पक्षियों को वर्षा, धूप, जानवरों इत्यादि से बचाने के लिए उनके आवास अर्थात रहने का प्रबंध करना होगा। उद्यमी कन्वेंशनल चिकन फार्म एवं फ्री रेंज चिकन फार्म में से किसी एक का चयन करके उसी अनुसार आवास का प्रबंध कर सकता है। इसके अलावा उद्यमी को चिकन फार्म में इस्तेमाल में लायी जाने वाली अनेकों उपकरण एवं बर्तन खरीदने की आवश्यकता होती है । जो पक्षियों को खाना खिलाने, पानी पिलाने, सफाई करने एवं उनकी देखभाल करने के इस्तेमाल में लाये जाते हैं।         

7. पक्षियों के लिए खाने का प्रबंध करें (Feed for Poultry Farming )

जहाँ तक फार्म में उपलब्ध पक्षियों के खाने का सवाल है लगभग दोनों तरह की मुर्गियां चाहे वह लेयर हों या ब्रायलर लगभग एक ही तरह का खाना खाती हैं। लेकिन इनमें समय एवं मात्रा का अंतर होता है अर्थात कौन से प्रकार की मुर्गी को कितना एवं कब कितना खाना देना है यह अंतरित हो सकता है । आम तौर पर देखा गया है की जैसे जैसे चूजों का साइज़ बढ़ता जाता है वैसे वैसे उद्यमी को इनके खाने की मात्रा एवं क्वालिटी दोनों में सुधार करने की आवश्यकता होती है।

ताकि ये नियत समय पर परिपक्व होकर उद्यमी की कमाई का जरिया बन सकें। लेयर पक्षियों के खाने में कैल्शियम की पर्याप्त  मात्रा होनी चाहिए और इन्हें दिन में लगभग तीन से चार बार खाना खिलाना चाहिए। और ब्रायलर पक्षियों के खाने में प्रोटीन की पर्याप्त मात्रा होनी चाहिए ये मुर्गियां गर्मीं के बजाय सर्दियों में अधिक खाना खाती हैं। और दूसरा तथ्य यह भी है की ये लेयर पक्षियों की तुलना में पानी अधिक पीती हैं इसलिए उद्यमी द्वारा इन्हें पर्याप्त मात्रा में पानी पिलाना नितांत आवश्यक है। जहाँ तक चूजों को खरीदने की बात है उद्यमी इन्हें नजदीकी हेचरी से आसानी से खरीद सकता है।       

8. बाजार ढूंढें (Search Your Market)

चूँकि अब उद्यमी अपने पोल्ट्री फार्म को शुरू करने की तरफ लगभग सारे कदम उठा चूका है तो अब उसका अगला कदम अपने उत्पादों के लिए मार्किट ढूँढने का होना चाहिए। इस बिजनेस में उद्यमी को अपना मार्किट ढूँढने के लिए पर्याप्त समय स्वत: ही मिल जाता है ।  क्योंकि चूजों को परिपक्व होने में लगभग 35-45 दिनों का समय लगता है इस बीच उद्यमी इनके लिए बाजार ढूंढ सकता है। 

और उद्यमी को कोशिश करनी चाहिए की उसको उसके ग्राहक उसी एरिया में मिल जाएँ क्योंकि यदि ऐसा होता है तो उद्यमी ट्रांसपोर्ट करने में आने वाली लागत को बचा पाने में सफल होगा जिससे उसका लाभ बढ़ जायेगा। और दूसरा फायदा यह होता है की उद्यमी अपने उत्पाद जैसे मुर्गी एवं अण्डों को सुरक्षित रूप से पहुँचाने में भी सफल हो पाता है। दूर की स्थिति में अण्डों के फूटने एवं मुर्गियों के मरने का डर लगा रहता है। इसलिए शुरूआती दौर में उद्यमी को यही कोशिश करनी चाहिए की उसका माल स्थानीय बाज़ारों में ही बिक जाय ।

लेकिन दूसरी तरफ उद्यमी को इस बात का विश्लेषण करना होगा की उसके पोल्ट्री फार्म की उत्पादन क्षमता क्या है? और वहां पर स्थित स्थानीय बाज़ारों में इसकी कितनी मांग है। यदि स्थानीय बाज़ारों में उद्यमी की उत्पादन क्षमता से अधिक मांग हुई तो उद्यमी के उत्पाद वही बिक सकते हैं। लेकिन यदि उत्पादन अधिक हुआ तो उद्यमी को अपने उत्पाद शहरों यानिकी अन्य बाज़ारों की तरफ भी सप्लाई करने होंगे।         

9. ग्राहकों एवं उपभोक्ताओं को जानें (Know your Customer):

आम तौर पर देखा जाय तो आम लोगों द्वारा ग्राहक एवं उपभोक्ता को एक ही समझ लिया जाता है जबकि सच्चाई कुछ और ही है। अर्थात कहने का आशय यह है की ग्राहक एवं उपभोक्ता में अंतर होता है। इसलिए यदि हम ग्राहक की बात करें तो यह वह व्यक्ति होता है जो उद्यमी के उत्पाद खरीदता है और उपभोक्ता वह व्यक्ति होता है जो उद्यमी के उत्पाद का उपभोग करता है।

हालांकि हम इसे इस तरह से समझने की कोशिश कर सकते हैं की जिस प्रकार उद्यमी के लिए खरीदने वाला दुकानदार  उसका ग्राहक है ठीक उसी प्रकार उस दुकानदार के लिए उससे वही चीज खरीदने वाला व्यक्ति भी उसका ग्राहक है और उद्यमी के लिए उसका उपभोक्ता है। इस व्यवसाय में उद्यमी के ग्राहक के तौर पर होटल के मालिक एवं चिकन शॉप के मालिक हो सकते हैं। जबकि उपभोक्ता के तौर पर होटल में नॉन वेग खाने वाले लोग एवं चिकन शॉप से चिकन खरीदने वाले लोग हो सकते हैं। यही कारण है की उद्यमी को अपने ग्राहक एवं उपभोक्ताओं को जानने की आवश्यकता होती है।       

10. बिजनेस गतिविधियों एवं एकाउंटिंग का रिकॉर्ड रखें

उद्यमी का Poultry Farming Business किस दिशा में अग्रसित हो रहा है यह जानने के लिए व्यापारिक गतिविधियों जैसे खर्चे, बिक्री इत्यादि का सही ढंग से रिकॉर्ड रखना बेहद आवश्यक है। इसके लिए उद्यमी चाहे तो किसी अकाउंटेंट को पार्ट टाइम जॉब के तौर पर यह काम असाइन करके भी इसे करा सकता है ।

और जहाँ तक अन्य गतिविधियों की बात है इसके लिए उद्यमी कैश रिसीप्ट बुक की भी मदद ले सकता है अर्थात जब भी उद्यमी को उत्पाद बेचकर नगदी प्राप्त हो वह उसकी एंट्री अपने कैश रिसीप्ट बुक में अवश्य कर ले। और जहाँ से भुगतान महीने महीने में मिलने वाला हो उसके लिए चालान प्रणाली को जारी रखे। इस प्रणाली में ग्राहक जैसे ही आर्डर करेगा उस आर्डर के साथ चालान की दो प्रतियाँ भेजी जाती हैं। इसमें एक प्रति ग्राहक अपने रिकॉर्ड में रख लेता है और दूसरी कॉपी में हस्ताक्षर या मुहर लगाकर वापस दे देता है।

और महीने की अंतिम तारीख तक जितने चालान हुए उन सबमें उल्लेखित आर्डर का एक साथ बिल जनरेट करके ग्राहक को भेज दिया जाता है। इसके अलावा मुर्गी फार्म को अच्छे ढंग से संचालित करने के लिए उद्यमी को एक और रजिस्टर मेन्टेन करने की आवश्यकता हो सकती है जिसमें पक्षियों का भोजन चार्ट यानिकी खाने पीने का चार्ट बनाया जा सकता है। इसमें भोजन, पानी इत्यादि की मात्रा से लेकर निर्धारित समय भी उल्लेखित किया जाना बेहद जरुरी है। क्योंकि उद्यमी की पोल्ट्री फार्म की सफलता पक्षियों के विकास एवं स्वास्थ्य पर ही निर्भर करेगी।

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