पेपर स्ट्रॉ बनाने का बिजनेस कैसे शुरू करें। पेय पीने वाली पाइप ।

विभिन्न तरल पेय पदार्थों को पीने के लिए स्ट्रॉ का इस्तेमाल किया जाता है । लेकिन वर्तमान में भारत सरकार ने प्लास्टिक से बनी हुई स्ट्रॉ पर प्रतिबंध लगा दिया है। जिसके चलते कागज़ से निर्मित स्ट्रॉ की बिक्री होने की संभावना बहुत अधिक हो गई है ।

स्ट्रॉ का इस्तेमाल सिर्फ कोल्ड ड्रिंक पीने के लिए नहीं बल्कि विभिन्न प्रकार के जूस, एनर्जी ड्रिंक, नारियल पानी इत्यादि पीने के लिए भी बड़ी मात्रा में किया जाता है। आम तौर पर अधिकतर पेय बोतलनुमा पैकिंग में ही आते हैं। जिनका उपरी हिस्सा बहुत संकरा होता है, जिसमें आप चम्मच इत्यादि नहीं डाल सकते।

इन्हीं बोतलनुमा संकरी मुहँ वाली पैकिंग से विभिन्न प्रकार के पेय पदार्थों को पीने के लिए स्ट्रॉ का इस्तेमाल किया जाता है। और जुलाई 2022 से पहले इनका प्लास्टिक से निर्मित स्ट्रॉ का इस्तेमाल बड़ी मात्रा में किया जाता था।

लेकिन जब से प्लास्टिक से निर्मित स्ट्रॉ पर सरकार द्वारा प्रतिबंध लगाया गया है, तब से पेपर से निर्मित स्ट्रॉ की बिक्री होने की संभावना काफी बढ़ गई है। वैसे देखा जाय तो यह आइटम तो बेहद छोटी है, लेकिन इसका इस्तेमाल और माँग बाज़ारों में बहुत अधिक है। इसलिए पेपर स्ट्रॉ बनाने का यह बिजनेस शुरू करना भी काफी फायदेमंद हो सकता है।

paper straw banane ka business

स्ट्रॉ क्या होती है (What is a paper straw in Hindi ):  

Straw Kya hoti hai : एक स्ट्रॉ एक पतली सी सिलिंडरनुमा पाइप होती है, जो उपयोगकर्ता को किसी बोतल या गिलास में उपलब्ध पेय को आसानी से पीने की सुविधा प्रदान करती है। जहाँ तक पेपर स्ट्रॉ की बात है इसे हम कागज़ से निर्मित एक पतली ट्यूब भी कह सकते हैं, जिसके एक सिरे को पेय में डुबाया जाता है, और दुसरे सिरे को मुहँ से लगाकर पेय को पीया जाता है।

जहाँ तक स्ट्रॉ के आकार का सवाल है ये या तो सीढ़ी आकृति में हो सकता हैं, या आधे में से मुड़े हुए झुके हुए भी हो सकता है। ताकि इन्हें मुहँ की ओर जबरदस्ती न मोड़ना पड़े। देश में सिंगल यूज प्लास्टिक पर लगे प्रतिबंध के बाद बहुत सारी ऐसी, कंपनियाँ हैं जिन्होंने अपने परिसरों में प्लास्टिक से निर्मित स्ट्रॉ को इस्तेमाल करना बंद कर दिया है।

पेपर स्ट्रॉ की बिक्री की संभावना

पैकेजिंग उद्योगों में प्लास्टिक उत्पादों का इस्तेमाल काफी हद तक कम हो रहा है और यह धीरे धीरे गैर प्लास्टिक उत्पादों की ओर बढ़ रहा है। घर, पार्टियों, यात्रा के दौरान, खाद्य स्टालों, स्कूल, ऑफिस एवं अन्य जगहों पर पेपर स्ट्रॉ के इस्तेमाल बढ़ रहे हैं। यद्यपि हम वैश्विक तौर पर इस औदायौगिक क्षेत्र की बात करें तो इसे प्लास्टिक और पेपर से निर्मित ड्रिंकिंग स्ट्रॉ में बाँटा जा सकता है।

प्लास्टिक से होने वाले वातावरण के नुकसान को देखते हुए लगभग सभी देशों में प्लास्टिक से निर्मित स्ट्रॉ के इस्तेमाल में काफी कमी दिखाई दे रही है। और बहुत सारे देश ऐसे हैं, जिन्होंने इस तरह की स्ट्रॉ पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाया है। इससे पेपर से निर्मित स्ट्रॉ की माँग बाज़ारों में तेजी से बढ़ने लगी है।

नगर निगम, नगर पालिका और सरकारों द्वारा प्लास्टिक से निर्मित स्ट्रॉ पर लगे प्रतिबंध का पूरा फायदा पेपर से निर्मित स्ट्रॉ को मिलने की उम्मीद लगाई जा सकती है।  

पेपर स्ट्रॉ बनाने का बिजनेस कैसे शुरू करें ( How to Start Straw Making Business in Hindi)

Straw Banane ka business kaise shuru kare : यदि आपको लगता है की आप अपनी फैक्ट्री द्वारा उत्पादित उत्पाद को ग्राहकों को आसानी से बेच पाएंगे। तो आप स्ट्रॉ बनाने का बिजनेस शुरू कर सकते हैं। आइये जानते हैं की इस तरह का यह बिजनेस शुरू करने के लिए किसी इच्छुक उद्यमी को क्या क्या कदम उठाने की आवश्यकता हो सकती है।

जरुरी वित्त का प्रबंध करें

पेपर स्ट्रॉ बनाने का बिजनेस शुरू करने के लिए प्रमुख खर्चा मशीन को खरीदने में आने वाला खर्चा है। इस तरह की मशीन अलग अलग उत्पादन क्षमता के साथ आती है, इसलिए इनकी कीमत भी इनकी उत्पादन क्षमता के आधार पर अलग अलग हो सकती है। आम तौर पर इस तरह की मशीन की कीमत 7.5 लाख रूपये से 15 लाख रूपये तक कुछ भी हो सकती है।  

इसलिए बेहतर यही होगा की उद्यमी अपने व्यवसाय को शुरू करने की ओर कोई भी कदम उठाने से पहले एक प्रभावी बिजनेस प्लान तैयार कर ले क्योंकि यह उसके व्यवसाय का एक ऐसा दस्तावेज होगा जो उसे न सिर्फ अनुमानित खर्चे के बारे में बताएगा, बल्कि भविष्य में होने वाली अनुमानित कमाई और बिजनेस के लक्ष्यों के प्रति भी उद्यमी को स्पष्ट रास्ता दिखाने का काम करेगा।

वित्त का प्रबंध करने के लिए उद्यमी चाहे तो बैंक ऋण, एंजेल इन्वेस्टर, क्राउड फंडिंग जैसे विकल्पों को भी अपना सकता है।     

जगह का प्रबंध करें

स्ट्रॉ एक छोटी सी आइटम है जिसे आसानी से कहीं भी किसी भी छोटी सी जगह में भी भंडारित किया जा सकता है। जहाँ तक इसकी मशीन की बात है इसके लिए भी बहुत बड़ी जगह की आवश्यकता नहीं होती। लेकिन जगह भले ही उद्यमी दो तीन कमरों वाली ले ले चलेगा, पर वहां पर उद्यमी को कमर्शियल बिजली और पानी के कनेक्शन की आवश्यकता होगी।

यद्यपि इस तरह का व्यवसाय बहुत ज्यादा गंदगी फ़ैलाने वाला व्यवसाय नहीं है, लेकिन इसके बावजूद भी उद्यमी को पीने के पानी और साफ़ सफाई करने के लिए पानी की उचित व्यवस्था करने की आवश्यकता होती है।     

जरुरी लाइसेंस और पंजीकरण प्राप्त करें

सबसे पहले अपने उद्यम को वैधानिक स्वरूप प्रदान करने के लिए इसे वन पर्सन कंपनी, पार्टनरशिप फर्म या फिर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के तौर पर रजिस्टर करें। उसके बाद जरुरी टैक्स रजिस्ट्रेशन करें। अपने व्यवसाय के नाम से पैन कार्ड, बैंक में चालू खाता भी खुलवाएं।

यदि आप MSME के तौर पर विभिन्न सरकारी योजनाओं जिन्हें सरकार MSME के उत्थान के लिए चलाती है। का फायदा लेना चाहते हैं, तो आपको उद्यम रजिस्ट्रेशन भी कराना होगा। इसके अलावा आपको स्थानीय निकाय से ट्रेड लाइसेंस की भी आवश्यकता हो सकती है।    

मशीनरी और कच्चे माल का प्रबंध करें

अब उद्यमी का अगला कदम मशीनरी और कच्चे माल का प्रबंध करने का होना चाहिए। आप विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफोर्म जैसे इंडियामार्ट, ट्रेडइंडिया के माध्यम से भी मशीनरी और कच्चे माल का सप्लायर ढूंढकर उनसे कोटेशन मंगा सकते हैं।

कच्चे माल की लिस्ट

  • फ़ूड ग्रेड पेपर
  • फ़ूड ग्रेड गम पाउडर
  • पैकेजिंग सामग्री

मशीनरी की लिस्ट

  • पेपर स्ट्रॉ बनाने की मशीन
  • अन्य उपकरण एवं हैण्ड टूल्स      

प्लांट एवं मशीनरी का इंस्टालेशन करें

अपने व्यवसायिक परिसर में प्लांट एवं मशीनरी का इंस्टालेशन करते समय आपको अनेकों सुरक्षा मानकों का ध्यान रखना होता है। ताकि काम करने वाले कर्मचारियों एवं अन्य को किसी प्रकार का कोई खतरा न हो।

इनमें मुख्य तौर पर आग और विद्युत् जनित खतरों को ध्यान में रखा जाता है। आग से सुरक्षा के लिए आपको अपने परिसर में हौज रील, स्प्रिंकलर, फायर एक्स्ट्रीग्यूशर इत्यादि इंस्टाल करने की आवश्यकता हो सकती है।    

आवश्यक कर्मचारियों की नियुक्त करें

इस बिजनेस के लिए उद्यमी को कितने कर्मचारियों की आवश्यकता होगी, यह सब कुछ उद्यमी की फैक्ट्री के आकार पर निर्भर करता है। लेकिन प्लांट को एक दिन में कम से कम 12 घंटे संचालित रखने के लिए उद्यमी को मशीन ऑपरेटर, हेल्पर, ऑफिस असिस्टेंट, मार्केटिंग पर्सन, सुपरवाइजर, मैनेजर इत्यादि को नियुक्त करने की आवश्यकता हो सकती है।  

कमर्शियल ट्रायल शुरू करें

अब जब उद्यमी द्वारा स्ट्रॉ बिजनेस शुरू करने की ओर सारे कदम पूर्ण कर लिए जाते हैं, तो उसके बाद उद्यमी को अपनी फैक्ट्री में इसका कमर्शियल ट्रायल शुरू कर देना चाहिए। इस तरह के उत्पाद के लिए कोई लग से गुणवत्ता मानक निर्धारित नहीं है। लेकिन उद्यमी को सभी गुणवत्ता मानकों को ध्यान में रखकर ही इसका उत्पादन करना चाहिए।

Straw Manufacturing in Hindi (स्ट्रॉ निर्माण प्रक्रिया) :  स्ट्रॉ का निर्माण करने के लिए उद्यमी द्वारा अच्छी गुणवत्ता का फ़ूड ग्रेड पेपर एवं अन्य सहायक कच्चा माल सप्लायर से खरीद लिया जाता है। यह फ़ूड ग्रेड पेपर कई रंगों का हो सकता है, और जब जिस रंग की स्ट्रॉ बनाने की आवश्यकता हो तब उसी रंग के फ़ूड ग्रेड पेपर का इस्तेमाल किया जा सकता है।

इन्हें मशीन में लगे पेपर रोल स्टैंड पर माउंट किया जाता है, और रोलर्स के माध्यम से मशीन में भेजा जाता है। जहाँ इन्हें मशीन के अन्दर ग्लुइंग सेक्शन में भेजकर फ़ूड ग्रेड गोंद का इस्तेमाल कागज के कोनों पर लगाने के लिए किया जाता है।

उसके बाद रोलर्स का एक सेट इस कागज को एक बेलनाकार आकृति में ढालने का काम करता है, स्ट्रॉ का भीतरी व्यास 4.7 मिमी से 20 मिमी तक कुछ भी रखा जा सकता है। उसके बाद कागज़ की दोनों पट्टियों को आपस में अच्छी तरह छिपकर दिया जाता है। और फिर स्ट्रॉ को कटिंग सेक्शन में भेज दिया जाता है।

यहाँ पर मशीन के अन्दर लगे कटर स्ट्रॉ को आवश्यक लम्बाई में काट लेते हैं, उसके बाद इन्हें डिब्बे में पैकिंग करके बाज़ार में बेचने के लिए भेज दिया जाता है।  

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