ईट बनाने का व्यवसाय कैसे शुरू करें? Bricks Manufacturing Business.

शायद ईट का इस्तेमाल किस पैमाने पर होता है यह बताने की आवश्यकता नहीं है । घर, बिल्डिंग इत्यादि के निर्माण में ईटों का इस्तेमाल बड़ी मात्रा में होता है। हमारा देश भारत ईट उत्पादन में दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा देश है। यद्यपि ईट बनाने के भट्ठे दशकों से चलते आ रहे हैं। लेकिन आज भी ईटों के निर्माण की प्रक्रिया में ज्यादा अंतर नहीं हुआ है। लेकिन तकनिकी प्रगति का असर ईट भट्ठों पर भी साफ़ दिखाई देता है अब ये पहले के मुकाबले ज्यादा कुशल हो गए हैं। और इनके द्वारा उत्पादित उत्पादों की गुणवत्ता में भी काफी सुधार हो गया है।

ईट बनाने के उद्योग से जुड़े उद्यमियों को कच्चे माल और गुणवत्ता का पूर्ण ज्ञान होने, ईटों को पकाने में बेहतर नियंत्रण होने, ईटों के भट्ठे के डिजाईन अधिक बेहतर होने और तकनीक पर आधारित अधिक उन्नत मशीनीकरण ने इस उद्योग को विकसित होने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

ईट बनाने का कारखाना
ईट बनाने का कारखाना

हमारा देश विकासशील देश है, और जब कोई देश विकास की रह पर अग्रसित होता है तो उसे शहरीकरण और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान केन्द्रित करने की आवश्यकता होती है। जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है की भविष्य में ईटों की माँग और अधिक बढ़ने वाली है।

जनसँख्या में वृद्धि और लोगों की आय में बढ़ोतरी इसके अलावा संयुक्त परिवारों के विघटन के चलते भी निर्माण गतिविधियों के बढ़ने की संभावना है। वह इसलिए जहाँ संयुक्त परिवार में रह रहे सभी परिवार के सदस्यों के पास एक ही घर होता था, वर्तमान में परिवार के हर एक सदस्य अपना स्वयं का घर बनाना चाहता है। इसलिए यदि आप कोई व्यवसाय शुरू करने पर विचार कर रहे हैं तो ईट का कारखाना खोलना आपके लिए काफी लाभदायक हो सकता है ।

ईट क्या होते हैं और इसके उपयोग

यह उत्पाद यानिकी ईट मिटटी या शेल (Shale) से बना होता है । मिटटी या शेल को सुखाकर और आग में पकाकर एक मजबूत और टिकाऊ उत्पाद में बदल दिया जाता है जिसे ईट कहते हैं। आम तौर पर ईटों को बनाने की प्रक्रिया बेहद आसान होती है इन्हें तीन विधियों का इस्तेमाल करके आकार दिया जा सकता है।

एक्सट्रूडेड विधि का इस्तेमाल कठोर मिटटी के लिए किया जाता है, दूसरी मोल्डेड विधि के लिए नरम मिटटी की आवश्यकता होती है तीसरी ड्राई प्रेस विधि का इस्तेमाल ईटों को आकार देने के लिए किया जाता है। लेकिन इन सबमें अधिकांश तौर पर ईट बनाने के लिए एक्सट्रूडेड विधि का इस्तेमाल किया जाता है।

ईटों का रंग मिटटी के रंग या इसके बाहर लगाई जाने वाली कोटिंग के माध्यम से प्राप्त किया जाता है । इस रंग को ईटों को पकाने से पहले या बाद में कभी भी प्राप्त किया जा सकता है, इसमें की जाने वाली कोटिंग टिकाऊ होती है जो कभी भी फीकी या कम नहीं होती है। ईट बनाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली विधियों का इसकी बनावट पर प्रभाव पड़ता है और यदि निर्माण प्रक्रिया के दौरान विट्रिफिकेशन हुआ तो ईट सिकुड़ जाती है। एक्सट्रूडेड विधि से विभिन्न बनावट की ईटों को तैयार किया जा सकता है।

ईट का कारखाना लगाने के क्या क्या लाभ हैं?

कोई भी व्यवसाय शुरू करने से पहले उसके लाभ एवं चुनौतियों के बारे में जानना आवश्यक हो जाता है। भारत में ईट बनाने का बिजनेस शुरू करने के कई फायदे हैं, इनमें से कुछ निम्न हैं।

  • कम पूँजी के साथ भी शुरू किया जा सकता है।
  • निर्माण गतिविधियों के बढ़ोत्तरी के चलते ईटों की माँग लगातार बढती जा रही है।
  • व्यवसाय को स्थापित करने और शुरू करने में तुलनात्मक रूप से कम लागत आती है ।
  • अनुकूल लघु व्यवसाय होने के कारण जोखिम की न्यूनता।
  • ईटों को बनाने की प्रक्रिया बेहद सरल है और इसे कोई भी शिक्षित अशिक्षित व्यक्ति आसानी से समझ सकता है।
  • स्थानीय और क्षेत्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा का आकलन करना आसान हो जाता है।
  • कम मजदूरों से भी काम चलाया जा सकता है।
  • कच्चे माल की बर्बादी नाममात्र होती है।
  • ईट बनाने के व्यवसाय में संगठित क्षेत्र से बहुत कम संगठन इस काम से जुड़े हैं।
  • ईट और इससे जुड़े सह उत्पादों को आसानी से रीसायकल किया जा सकता है ।            

ईटों का निर्माण कैसे किया जाता है  

ईटों का निर्माण करने में चार चरण शामिल हैं।

मिटटी की तैयारी

ईटों का निर्माण करने के लिए साफ़ मिटटी की आवश्यकता होती है इसलिए सबसे पहले इस प्रक्रिया में मिटटी को तैयार करने की प्रक्रिया को पूर्ण किया जाता है। मिटटी के उपरी परत में अत्यधिक अशुद्धियाँ होती हैं, यही कारण है की उपरी परत का लगभग 200mm तक की गहराई वाली मिटटी को फेंक दिया जाता है। इस प्रक्रिया को अनसॉइलिंग कहा जाता है।

मिटटी की उपरी परत को हटाने के बाद मिटटी को समतल जमीन पर फैलाया जाता है, उसके बाद इस मिटटी से भी बचे अपशिष्टों जैसे पत्थरों, वनस्पति इत्यादि को दूर किया जाता है और जरूरत पड़ने पर मिटटी को धोया भी जा सकता है।

उसके बाद मिटटी कुचलने वाले रोलर्स की मदद से पूरी मिटटी को पाउडर रूप में बदल दिया जाता है, ध्यान रहे इस प्रक्रिया में मिटटी में गाँठ नहीं होनी चाहिए। उसके बाद मिटटी को मोल्डिंग के लिए उपयुक्त बनाने के लिए पग मिल का इस्तेमाल ग्राइंडर के तौर पर किया जा सकता है।, और जब मिटटी प्लास्टिक की तरह लचीलापन प्राप्त कर लेती है, तो माना जाता है की यह मोल्डिंग के लिए उपयुक्त हो गई है।

मोल्डिंग प्रक्रिया को पूर्ण किया जाता है

इस प्रक्रिया में ईट बनाने के लिए मिटटी को ईट के आकार में ढाला जाता है और इस तरह की प्रक्रिया को परियोजना के अनुसार दो तरह से पूर्ण किया जा सकता है।

  • छोटी परियोजनाओं में यह प्रक्रिया हैण्ड मोल्डिंग के माध्यम से की जाती है।
  • बड़ी परियोजनाओं में यह प्रक्रिया मशीन मोल्डिंग के माध्यम से की जाती है।         

हैण्ड मोल्डिंग

इस प्रकार की मोल्डिंग का इस्तेमाल ऐसे ईट भट्ठों पर किया जाता है जो आम तौर पर छोटे होते हैं और जहाँ मजदूर इत्यादि सस्ती दरों पर उपलब्ध होते हैं । क्योंकि हैण्ड मोल्डिंग प्रक्रिया के माध्यम से ईटों का निर्माण करने के लिए मजदूर अपने हाथों का इस्तेमाल करते हैं, इसलिए अधिक उत्पादन के लिए इसमें मजदूरों की संख्या अधिक चाहिए होती है। हाथ से भरे जाने वाले ये मोल्ड स्टील या लकड़ी के होते हैं, जो ईटों के आकार के होते हैं इसमें मजदूर अपने हाथों से मिटटी भरते हैं। और फिर उसे सुखाने के लिए जमीन पर पलट देते हैं।

मशीन मोल्डिंग

आम तौर पर हैण्ड मोल्डिंग के माध्यम से उत्पादित ईटों की कीमत मशीन मोल्डिंग से उत्पादित ईटों की कीमत से अधिक होती है। कहने का आशय यह है की मशीन मोल्डिंग से उत्पादित ईटें काफी किफायती होती हैं । और इनके निर्माण के लिए भी दो प्रकार की मशीन प्लास्टिक क्ले मशीन और ड्राई क्ले मशीन का इस्तेमाल किया जाता है।     

प्लास्टिक क्ले मशीन

इस तरह की मशीन में भी आयताकार यानिकी ईट के आकार के सांचे होते हैं और जब इस मशीन में टेम्पर्ड मिटटी पड़ती है तो यह उस आयताकार सांचे के माध्यम से बाहर आ जाती है। उसके बाद यह आयातकर पट्टी जो मशीन से निकली होती है उसे ईट का आकार देने के लिए तार से काट दिया जाता है। और जब इन्हें ईट के आकार में काट लिया जाता है तो उसके बाद ये सुखाने के लिए तैयार हो जाती हैं।

ड्राई क्ले मशीन  

ईट बनाने की प्रकिया में यह मशीन सबसे अधिक समय बचाने वाली मशीन होती है, वह इसलिए क्योंकि इस मशीन में मिटटी और पानी दोनों डाल दिया जाता है। और मिटटी को पानी के साथ मिलाने का काम और उसे आवश्यक कठोरता में बदलने का काम सब यह मशीन ही करती है।

और जब मिटटी पानी के साथ मिलकर आवश्यक कठोरता प्राप्त कर लेती है तो उसके बाद या मशीन उस मिटटी को मोल्ड में भेज देती है और फिर उसे प्रेस करके ईट का स्वरूप प्रदान कर देती है। इस मशीन से उत्पादित ईटों को सुखाने की आवश्यकता नहीं होती है बल्कि इन्हें सीधे आग में पकाने के लिए भेज दिया जाता है।

कच्ची ईटों को सुखाने की प्रक्रिया

चूँकि मोल्डिंग प्रक्रिया से गुजरने के बाद ईटों में कुछ नमी और शेष रह जाती है इसलिए इन्हें सुखाना बेहद आवश्यक हो जाता है। यदि ऐसा नहीं किया तो ईटों को जब पकाया जाता है तो वे फट सकती हैं। कच्ची ईटों को प्राकृतिक धूप और हवा में ही 3-10 दिनों तक सुखाया जाता है। हालांकि यह मौसम पर निर्भर करता है यदि तेज धूप हो तो तीन दिन में भी कच्ची ईटें सूख सकती हैं। बारीश के पानी से बचाने के लिए इन्हें सुखाने के लिए जमीन से ऊपर उठे हुए कुछ यार्ड भी तैयार किये जा सकते हैं।

ईटों को आग में पकाने की प्रक्रिया

यदि उद्यमी छोटे पैमाने पर ईट बनाने का व्यवसाय कर रहा हो तो वह ईटों को क्लैंप में पकाने का या जलाने का काम करता है। जबकि बड़े पैमाने पर ईटों को पकाने के लिए ईट के भट्ठों का इस्तेमाल किया जाता है। ईटों को जलाने और पकाने से इन्हें मजबूती मिलती है इसलिए ईट बनाने की प्रक्रिया में यह सबसे महत्वपूर्ण चरण होता है। इस चरण में ईटों को 1100®C के तापमान पर पकाया जाता है । ईटों को निर्धारित मानकों से न तो अधिक और न ही कम जलाया जाना चाहिए।    

ईट बनाने का बिजनेस कैसे शुरू करें?

बिजनेस चाहे ईट बनाने का हो या कोई अन्य इसे शुरू करने के लिए उद्यमी को कई प्रक्रियाओं से होकर गुजरना होता है। इनमें व्यवसाय की योजना बनाने से लेकर मशीनरी उपकरणों की खरीदारी और कर्मचारियों की नियुक्ति तक कई अहम् पहलू हैं । जिन पहलुओं पर बिजनेस शुरू करने वाले उद्यमी को विचार करने की आवश्यकता होती है। भारत में ईट बनाने का बिजनेस शुरू करने के लिए निम्न पहलुओं पर विचार किया जा सकता है।

बिजनेस प्लान तैयार करना

जब एक बार आप इस बात का निर्णय ले लेते हैं की आपको ईट बनाने का बिजनेस शुरू करना है तो उसके बाद आपको अपने इस बिजनेस आईडिया को धरातल पर उतारने के लिए कार्य में लगना होगा। तो इस कार्य को अच्छे ढंग से क्रियान्वित करने और अपने बिजनेस आईडिया का पूर्व आकलन करने के लिए आपको एक प्रभावी बिजनेस प्लान बनाने की आवश्यकता होगी।

इस बिजनेस प्लान में वित्तीय आंकडें, मार्केटिंग रणनीति, मानव संसाधन से जुड़ा प्रबंधन, व्यवसाय को कुशलतापूर्वक चलाने की रणनीति इत्यादि लिखित रूप में समाहित होनी चाहिए। वैसे देखा जाय तो हर एक व्यवसायिक संगठन का उद्देश्य लाभ की कमाई करना होता है, लेकिन यह पहले वर्ष कितना रहेगा, या उसके अगले वर्षों में कितना रहेगा इसका आकलन भी लिखित रूप में होना चाहिए और इस लक्ष्य को पाने के लिए आप क्या कदम उठाएंगे इसका भी उल्लेख होना चाहिए।

लोकेशन का चुनाव करना

एक ईट का कारखाना स्थापित करने के लिए आपको अन्य बिजनेस की तुलना में बड़ी जगह की आवश्यकता हो सकती है। इसके अलावा इस बिजनेस में पानी की आवश्यकता भी बहुत अधिक पड़ती है। इसलिए ईट बनाने का बिजनेस शुरू करने के लिए लोकेशन का चुनाव करते समय इन बातों का ध्यान अवश्य रखा जाना चाहिए ।

यह भी ध्यान रखे की जिस लोकेशन पर आप ईट बनाने का बिजनेस शुरू करने का विचार कर रहे हैं। वहाँ तक यातायात की सुविधा अच्छी होनी चाहिए, और ईटों के भण्डारण के लिए स्टोर या गोदाम की भी व्यवस्था होनी चाहिए।    

कच्चे माल की उपलब्धता

ईटों के निर्माण में इस्तेमाल में लाया जाने वाला प्रमुख कच्चे माल में सीमेंट, पत्थर, रेत, पत्थर की धूल, पानी, सिलिका, चूना, मिट्टी इत्यादि शामिल हैं। इसलिए यदि आप चाहते हैं की आपको कच्चे माल को लाने के लिए अधिक किराया नहीं देना पड़े और समय पर आपकी फैक्ट्री में कच्चा माल पहुँचता रहे। तो इसके लिए आपको इस बात का भी ध्यान रखना होगा की आप ईट बनाने का बिजनेस उसी एरिया में शुरू करें जहाँ पर कच्चे माल की उपलब्धता प्रचुर मात्रा में हो।   

ईट बनाने के इस्तेमाल में लायी जाने वाली मशीनरी

जैसा की हम इस लेख में उपर्युक्त बता भी चुके हैं की ईटों का निर्माण हैण्ड मोल्डिंग और मशीन मोल्डिंग दोनों के माध्यम से किया जा सकता है। इसलिए अब ईट बनाने का बिजनेस शुरू करने वाले उद्यमी को इस बात का निर्णय लेना होगा की, वह ईटों का उत्पादन मशीन मोल्डिंग से करना चाहता है या फिर हैण्ड मोल्डिंग से।

यदि उद्यमी कम लागत में इस बिजनेस को शुरू करना चाहता है तो वह शुरूआती दौर में हैण्ड मोल्डिंग के माध्यम से ईटों का उत्पादन करने पर विचार कर सकता है। लेकिन इसके लिए उसे काम करने वाले मजदूरों की संख्या अधिक चाहिए होती है।    

आने वाली लागत का विश्लेषण

यद्यपि यदि उद्यमी द्वारा पहले ही एक प्रभावी बिजनेस प्लान तैयार कर लिया जाता है तो उद्यमी को अपने ईट का बिजनेस शुरू करने में आने वाली लागत का अनुमान लग जाता है। लेकिन इसके बावजूद भी उद्यमी अपने प्रोजेक्ट पर आने वाली लागत को कम करने के लिए कई कदम जैसे पुरानी मशीनरी खरीदना, कच्चा माल सस्ते दामों पर लेना, सस्ते मजदूर नियुक्त करना इत्यादि कदम उठा सकता है। लागत का विश्लेषण करते समय उपयोगिता लागत जैसे बिजली, पानी एवं अन्य बिलों को भी जोड़ना न भूलें।   

मौजूद प्रतिस्पर्धा का आकलन

यदि आप कहते स्तर पर ईट बनाने का बिजनेस शुरू कर रहे हैं तो आपके प्रमुख ग्राहकों के तौर पर स्थानीय लोग ही रहने वाले हैं। इसलिए पता करें की आपके उस एरिया में कितने ईट के भट्ठे हैं और वे अपने ग्राहकों को किस गुणवत्ता के ईट किस मूल्य पर प्रदान कर रहे हैं । इन सारी चीजों की जानकारी के बाद ही आप अपने उत्पाद की कीमत सुनिश्चित करें ताकि लम्बे समय तक आप इस प्रतिस्पर्धा वाले बाज़ार में बने रहें।   

जरुरी लाइसेंस और पंजीकरण  

ईट के भट्ठों में अग्नि प्रज्वलित होती है और अग्नि धुआँ इत्यादि भी पैदा कर सकती है। यही कारण है की पर्यावरण दूषित न हो इसके लिए ईट के भट्ठों इत्यादि से जुड़े कई कानून और नियम हैं। हो सकता है की कोई ऐसा एरिया हो जहाँ आप ईट का कारखाना नहीं खोल सकते। इसलिए ईट बनाने का बिजनेस शुरू करने वाले उद्यमी को चाहिए की वह ऐसे एरिया में ईट बनाने का कारखाना लगाये जो सरकार द्वारा निर्धारित हो।

आपको अपने बिजनेस को कम्पनी एक्ट, फैक्ट्री एक्ट के तहत रजिस्टर करके बिजनेस के नाम से चालू खाता, टैक्स रजिस्ट्रेशन इत्यादि कराने की भी आवश्यकता होती है।

अन्य लेख भी पढ़ें

error: Content is protected !!